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August 14, 2026
हिमाचल में अगले माह शुरू होगी जनगणना: जाति, बैंक खाते-कोविड वैक्सीन सहित पूछे जाएंगे ये 40 सवाल
देश में फरवरी 2027, हिमाचल में पांच माह पहले सितंबर से शुरू होगी जनगणना
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए जनगणना-2027 इस बार कुछ अलग होने जा रही है। देश के अधिकांश हिस्सों में जहां जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में होगी, वहीं हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले और दुर्गम इलाकों में यह प्रक्रिया करीब पांच महीने पहले, सितंबर 2026 में ही शुरू कर दी जाएगी। केंद्र सरकार ने हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में कराने का फैसला लिया है। इन क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तारीख 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
जनगणना-2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। गणनाकर्मी मोबाइल एप के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। लोगों के लिए सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। केंद्र सरकार के मुताबिक डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य गणना को अधिक तेज, व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।
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1. व्यक्ति का नाम
2. परिवार के मुखिया से संबंध
3. लिंग
4. जन्मतिथि और उम्र
5. वैवाहिक स्थिति
6. शादी के समय उम्र
7. पति/पत्नी का नाम
8. घोषित राष्ट्रीयता
9. धर्म
10. SC / ST / जाति
11. पिता की जानकारी
12. मां की जानकारी
13. दिव्यांगता
14. मातृभाषा और दूसरी भाषाएं
15. साक्षरता और डिजिटल साक्षरता
16. शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति
17. उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और स्टीम / विषय
18. पिछले एक साल में काम किया या नहीं
19. आर्थिक गतिविधि की श्रेणी
20. व्यवसाय
21. उद्योग, व्यापार या सेवा का प्रकार
22. कामगार की श्रेणी
23. गैर आर्थिक गतिविधि
24. काम की तलाश या उपलब्धता
25. काम की जगह तक यात्रा
26. जन्म स्थान
27. पिछला निवास स्थान
28. माइग्रेशन का कारण
29. पिछली जगह से यहां रहने की अवधि
30. स्थायी निवास का पता
31. वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या
32. अब तक जन्मे बच्चों की संख्या
33. पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या
34. कोविड- 19 वैक्सीनेशन की जगह
35. कुल बैंक अकाउंट
36. मोबाइल नंबर
37. आधार नंबर
38. वोटर ID नंबर
39. पासपोर्ट नंबर
40. ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं
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जनगणना के दौरान लोगों से उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक पहचान से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। इनमें नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, उम्र, वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता और धर्म जैसी जानकारी शामिल होगी। जाति से संबंधित जानकारी भी इसी विस्तृत व्यक्तिगत विवरण का हिस्सा होगी। इसके साथ माता-पिता से संबंधित जानकारी और परिवार में व्यक्ति की स्थिति जैसे विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। इस तरह सरकार के पास देश की आबादी की सामाजिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर का अधिक विस्तृत डाटा तैयार होगा।
नई जनगणना में शिक्षा से जुड़े आंकड़ों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। व्यक्ति की मातृभाषा, दूसरी भाषाओं का ज्ञान, साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति और उच्चतम शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि हिमाचल के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा तथा डिजिटल पहुंच की स्थिति क्या है और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मानव संसाधन की तस्वीर कैसी है।
जनगणना में रोजगार से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। पिछले एक साल में व्यक्ति ने काम किया या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि क्या है, वह किस तरह का काम करता है, कामगार की श्रेणी क्या है और काम किस क्षेत्र से संबंधित है जैसी जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा काम की तलाश, काम उपलब्ध होने की स्थिति और व्यक्ति अपने कार्यस्थल तक कैसे पहुंचता है, इससे संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इससे रोजगार और श्रम क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का व्यापक डाटा तैयार करने में मदद मिल सकती है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए प्रवास से संबंधित सवाल भी काफी अहम होंगे। व्यक्ति का जन्मस्थान, पिछला निवास स्थान, वहां रहने की अवधि, हिमाचल आने का कारण और स्थायी निवास से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों का प्रवास किस वजह से हुआ और हिमाचल के भीतर तथा बाहर आबादी के आवागमन का स्वरूप क्या है।
जनगणना में महिलाओं से प्रजनन और बच्चों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। इसमें जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में हुए जन्म से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे देश और प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि तथा जन्म दर से जुड़े आंकड़ों को समझने में मदद मिलेगी।
इस बार जनगणना के सवालों में कुछ ऐसे विषय भी शामिल किए गए हैं, जिनकी वजह से यह कवायद पहले की जनगणना से काफी अलग नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक लोगों से मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध होने से संबंधित जानकारी पूछी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों की जानकारी और कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई गई थी, इससे संबंधित सवाल भी शामिल हैं। इन सवालों के शामिल होने से डिजिटल पहचान, वित्तीय पहुंच और कोविड टीकाकरण जैसे पहलुओं से संबंधित जानकारी भी जनगणना के व्यापक डाटा में शामिल हो सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरे देश में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होनी है तो हिमाचल में सितंबर 2026 में ही यह काम क्यों कराया जा रहा है? इसका सीधा संबंध हिमाचल के मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों से है। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है और कई इलाकों का सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे में यदि इन क्षेत्रों में फरवरी 2027 के दौरान गणनाकर्मी भेजे जाएं तो हर घर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से केंद्र ने हिमाचल के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में Population Enumeration सितंबर 2026 में कराने का निर्णय लिया है। आधिकारिक तौर पर इन क्षेत्रों के लिए Census Moment यानी संदर्भ तारीख 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
सरकार की यह व्यवस्था हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सर्दियां शुरू होने से पहले गणनाकर्मी इन इलाकों तक पहुंचकर आबादी का आंकड़ा दर्ज कर सकेंगे। इससे बर्फबारी के कारण किसी गांव या परिवार के जनगणना से छूट जाने की आशंका को कम किया जा सकेगा। यानी हिमाचल में जनगणना पहले कराने का फैसला किसी अलग प्रक्रिया के कारण नहीं, बल्कि प्रदेश के कठिन मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है।