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August 30, 2025
मणिमहेश यात्रा: आपदा आपदा से टूटी सदियों पुरानी "डल तोड़ने" की परंपरा, चौगान बना आस्था का केंद्र
इतिहास में पहली बार टूटी डल तोड़ने की रस्म, चौगान में पूजा कर निभाई रस्में
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चंबा। हिमाचल प्रदेश की पवित्र मणिमहेश यात्रा इस बार इतिहास के एक अभूतपूर्व मोड़ पर थम गई। लगातार हो रही भारी बारिश, भूस्खलन और सड़क मार्गों के बंद होने के कारण वह परंपरा भी टूट गई, जिसे सदियों से हर हालात में निभाया जाता रहा है। भूस्खलन और खस्ताहाल रास्तों के चलते मणिमहेश डल झील तक पहुंचने वाली ऐतिहासिक छड़ी यात्राएं और पारंपरिक रस्में अधूरी रह गईं।
राधा अष्टमी पर मणिमहेश डल झील में संचुई गांव के शिव चेलों द्वारा निभाई जाने वाली "डल तोड़ने" की रस्म इस बार डल झील तक न पहुंच पाने के कारण पूरी नहीं हो सकी। पहली बारए राधा अष्टमी पर डल तोड़ने की सदियों पुरानी परंपरा मणिमहेश झील की बजाय चंबा चौगान के मैदान में पूरी की गई।
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इस बार की यात्रा ने इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया है, जिसमें आस्था और परंपरा पर प्रकृति की विकरालता भारी पड़ गई। फिर भीए श्रद्धालुओं ने हौसला नहीं खोया और चंबा चौगान आस्था का केंद्र बन गया और वहीं परंपराओं को निभाया गया।
हर वर्ष राधा अष्टमी के शुभ अवसर पर भरमौर के संचुई गांव के शिव चेले, मणिमहेश झील तक यात्रा कर "डल तोड़ने" की महत्वपूर्ण धार्मिक रस्म अदा करते हैं। यह रस्म मणिमहेश यात्रा के समापन की प्रतीक मानी जाती है, जो सदियों से निभाई जाती रही है चाहे परिस्थिति जैसी भी रही हो। लेकिन इस बार भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण हड़सर से ऊपर का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
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शिव चेलों ने यात्रा आरंभ की, पर मार्ग अवरुद्ध होने के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। सड़कें बंद होने के कारण न केवल शिव चेले, बल्कि जम्मू, डोडा, और भद्रवाह से आईं छड़ियां भी डल झील तक नहीं पहुंच सकीं। इस बार मार्ग अवरुद्ध होने से यह रस्म चंबा चौगान में ही अदा करनी पड़ी। हजारों श्रद्धालु वहां एकत्र हुए और आस्था के साथ पूजन-अर्चन किया। हालांकि आंखों में झील तक न पहुंच पाने का दर्द साफ झलक रहा था।
चंबा चौगान में रखी गई पवित्र छड़ियों की परिक्रमा करते समय श्रद्धालु भावुक हो उठे। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से आशीर्वाद मांगा। श्रद्धालुओं का कहना था कि भले ही वे डल झील तक न पहुंच पाए हों, लेकिन भगवान शिव सर्वव्यापी हैं और चौगान ही आज मणिमहेश डल बन गया।
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कई श्रद्धालुओं ने यह भी माना कि मणिमहेश डल पर सफाई और नीति.नियमों की अनदेखी के चलते प्रकृति नाराज हुई है। उनका कहना था कि आने वाले समय में हर श्रद्धालु को यात्रा के नियमों का पालन करना चाहिए और पवित्र झील की स्वच्छता को बनाए रखना चाहिए।
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स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह पहला अवसर है जब जम्मू और भद्रवाह से आने वाली कोई भी छड़ी मणिमहेश डल झील तक नहीं पहुंच पाई। इससे पहले कठिन परिस्थितियों में भी यह परंपरा निभाई जाती रही थी, लेकिन इस बार प्राकृतिक आपदा भारी पड़ गई।