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August 30, 2025
आपदा में फंसे मणिमहेश यात्रियों को परवेज अली ने दिया सहारा, 200 श्रद्धालुओं को ठहराया
परवेज और दिलदार अली भाईयों ने रात 11 बजे खोले अपने कॉलेज के दरवाजे
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। भूस्खलन के चलते हजारों मणिमहेश यात्री भी बीच रास्ते में फंस गए। वहीं जो श्रद्ाालु चंबा पहुंच गए थे, वह भी जगह जगह रास्ते बंद होने से चंबा और अन्य रास्तों में फंस गए। हाईवे पर बने खतरनाक हालातों ने जहां यात्रा को बाधित किया, वहीं इंसानियत की मिसालें भी सामने आईं। जिसका एक उदाहरण डलहौजी में देखने को मिला। यहां बीच रास्ते में फंसे सैंकड़ों श्रद्धालुओं को एक शख्स ने आगे बढ़कर ना सिर्फ सहारा दिया, बल्कि उनके खाने पीने की भी व्यवस्था की।
दरअसल चंबा में पहुंच रहे सैंकड़ों मणिमहेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने अस्थायी शिविरों का प्रबंध किया है। लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक है कि यह अस्थायी शिविर भी छोटे पड़ जा रहे हैं। जब प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी शिविरों बनीखेत के सामुदायिक भवन और स्थानीय सरकारी स्कूल में जगह कम पड़ गई, तब स्थानीय समाजसेवियों ने मदद के लिए आगे आकर एक नया उदाहरण पेश किया। बोंखरी मोड़ स्थित बट्ट कॉलेज ऑफ नर्सिंग के संचालक परवेज अली बट्ट और दिलदार अली बट्ट ने देर रात करीब 11 बजे अपने संस्थान के दरवाजे खोल दिए और लगभग 200 श्रद्धालुओं को आश्रय दिया।
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इतना ही नहीं बट्ट भाइयों ने न सिर्फ ठहरने की व्यवस्था की, बल्कि रात को खुद मौके पर पहुंचकर श्रद्धालुओं के लिए दूध, चाय और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था की। सुबह के समय नाश्ता भी वितरित किया गया। उनके इस कार्य ने न केवल संकट में फंसे लोगों को राहत दी, बल्कि भाईचारे की जीवंत तस्वीर भी पेश की।
बनीखेत स्थित आशीर्वाद अस्पताल की संचालक डॉ वंदना लखनपाल ने भी मानवता का परिचय देते हुए अपने अस्पताल परिसर और होटल में लगभग 100 यात्रियों को आश्रय दिया। उनके प्रयासों से न सिर्फ यात्रियों को सुरक्षित ठहरने का स्थान मिला, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें काफी राहत मिली।
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शनिवार सुबह लगभग 7:30 बजे जब मार्ग आंशिक रूप से बहाल किया गया, तब यात्रियों में राहत की लहर दौड़ गई और उन्होंने पठानकोट की ओर रवाना होना शुरू किया। हालांकि, आगे के रास्तों पर भी जगह-जगह भूस्खलन के कारण उन्हें फिर रुकना पड़ा, लेकिन प्रशासन लगातार सड़कों को बहाल करने में जुटा रहा। मशीनरी लगाकर मलबा हटाया जा रहा है और प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द पूरा मार्ग खुल जाए।
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प्रशासन ने समय रहते राहत कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन स्थानीय समाजसेवियों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी ने इस आपदा को एक मानवीय आंदोलन में बदल दिया। बट्ट कॉलेज ऑफ नर्सिंग और आशीर्वाद अस्पताल जैसे निजी संस्थानों ने यह सिद्ध कर दिया कि धर्म से ऊपर इंसानियत होती है। जहां एक ओर श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए निकले थे, वहीं दूसरी ओर इस कठिन यात्रा में उन्हें ऐसे "फरिश्ते" मिले, जिन्होंने उन्हें न केवल भोजन और आश्रय दिया, बल्कि यह भी बताया कि धर्म की असली परिभाषा सेवा में है।
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इस पूरी घटना में सबसे प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि संकट के इस समय में धार्मिक भेदभाव नहीं, बल्कि आपसी सहयोगए सम्मान और भाईचारे ने काम किया। मुस्लिम समुदाय के परवेज अली बट्ट और दिलदार अली बट्ट द्वारा हिंदू श्रद्धालुओं की सेवा करना यह दर्शाता है कि भारत की असली ताकत उसकी सांझी विरासत और एकता में है।