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August 16, 2025
मणिमहेश यात्रा: पहले ही दिन बढ़ी श्रद्धालुओं की मुश्किलें, पहाड़ दरका - रास्ते में फंसे हजारों श्रद्धालु
लूणा के पास दरका पहाड़, सड़क पर लगी वाहनों की लंबी लाइनें
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चंबा। हिमाचल प्रदेश की प्राचीन और श्रद्धा से परिपूर्ण मणिमहेश यात्रा आज जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विधिवत रूप से आरंभ हो गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पवित्र डल झील में डुबकी लगाने के लिए भरमौर की ओर रुख किया। यात्रा का आरंभ छोटे शाही स्नान के साथ हुआ, जो आज रात 9रू30 बजे तक चलेगा। लेकिन जहां एक ओर यात्रा के शुभारंभ पर भक्तों में भारी उत्साह देखा गया, वहीं दूसरी ओर चंबा.भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन ने इस धार्मिक उत्सव की शुरुआत में ही कठिनाइयों का पहाड़ खड़ा कर दिया।
शनिवार सुबह लगभग 10 बजे लूणा के समीप पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया, जिससे सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आ गिरे। इसके चलते चंबा से भरमौर की ओर जाने वाला मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इन वाहनों में सवार हजारों श्रद्धालु—including बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे—घंटों तक जाम में फंसे रहे।
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घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें हरकत में आ गईं। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों के ज़रिए मलबा हटाने का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मीत शर्मा ने जानकारी दी कि "लूणा क्षेत्र में भूस्खलन हुआ है। हमारी टीम मौके पर है और युद्धस्तर पर मलबा हटाने का कार्य जारी है। जल्द ही रास्ता बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।"
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हालांकि, अभी तक रास्ता पूरी तरह से खुला नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है। कई यात्री भूखे-प्यासे रास्तों में फंसे हैं और सुविधाओं की कमी के कारण असुविधा झेल रहे हैं।
उधर, मणिमहेश डल झील में छोटे शाही स्नान (छोटा न्हौण) की शुरुआत शुक्रवार रात 11:50 बजे से हो चुकी है। यह स्नान आज शनिवार रात 9:30 बजे तक चलेगा। कुल 21 घंटे 45 मिनट की इस विशेष अवधि में हज़ारों भक्त डल झील में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान शिव से कृपा की कामना कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पवित्र स्नान से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन के दुख-कष्ट भी दूर होते हैं। यह अवसर विशेष रूप से जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में होने के कारण और भी अधिक फलदायी माना जाता है।
इस बार मणिमहेश यात्रा का मुख्य आकर्षण "बड़ा शाही स्नान" 31 अगस्त को राधा अष्टमी के दिन आयोजित होगा। इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान करके भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने की कामना करेंगे।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मणिमहेश यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह यात्रा पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रशासन और पर्यावरण संगठनों ने यात्रियों से अपील की है कि वे प्लास्टिक का उपयोग न करें और पवित्र स्थल की स्वच्छता बनाए रखें।
मणिमहेश यात्रा 2025 का आरंभ आस्था और कठिनाइयों दोनों के बीच हुआ है। एक ओर जहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पवित्र स्नान के लिए उमड़ पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदा ने उनकी राह में अनचाही बाधा खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से हालात को सामान्य करता है और श्रद्धालुओं को उनके आध्यात्मिक सफर पर आगे बढ़ने में कितनी सहायता मिलती है।