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August 25, 2025

सदन में MLA और CM में तीखी नोकझोक: सुक्खू बोले- भाजपा को पेखुबेला प्रोजेक्ट का 'फोबिया'

सीएम बोले-भ्रष्टाचार हुआ है तो ईडी-सीबीआई से जांच करवाएं भाजपा

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himachal Vidhan sabha

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के छठे दिन आज सदन में पेखुबेला सोलर प्रोजेक्ट को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने नियम 67 के तहत इस प्रोजेक्ट में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। वहीं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया। इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

भाजपा विधायक के आरोप

विधायक बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पेखुबेला सोलर प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर प्रोजेक्ट स्थापित होना चाहिए था, वहां यह लगाया ही नहीं गया। 2 अगस्त को भारी बारिश के बाद प्रोजेक्ट जलमग्न हो गया और इसका उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी को प्रोजेक्ट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, लेकिन वह काम छोड़कर भाग गई।

 

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ठाकुर ने दावा किया कि कंपनी को 99 फीसदी भुगतान कर दिया गया, बावजूद इसके घटिया निर्माण कार्य पर किसी प्रकार का जुर्माना नहीं लगाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर 18 बार नियमों में बदलाव किए गए ताकि चुनिंदा कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में पावर कॉर्पोरेशन के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।

केंद्र में भाजपा सरकार करवा लें ईडी-सीबीआई जांच

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायक के आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा कि विपक्ष को इस प्रोजेक्ट को लेकर ‘फोबिया’ हो गया है। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा, “अगर वास्तव में भ्रष्टाचार हुआ है, तो केंद्र में आपकी सरकार है, ईडी और सीबीआई से जांच क्यों नहीं करवा लेते? केंद्र की एजेंसियां आपके ही अधीन हैं।”

 

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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पेखुबेला प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में पावर कॉर्पोरेशन के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मृत्यु की जांच पहले से ही सीबीआई द्वारा की जा रही है और यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा के चलते प्रोजेक्ट में पानी भर गया था, लेकिन उसे 15 सितंबर से फिर से चालू कर दिया जाएगा।

सरकार ने प्रोजेक्ट के 44 करोड़ रुपए रोके

मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना में गड़बड़ियों के संदेह को देखते हुए सरकार ने कंपनी के 44 करोड़ रुपये रोक दिए हैं, जिनमें से 22 करोड़ की बैंक गारंटी कैश कर ली गई है, जबकि 17.81 करोड़ रुपये की राशि भुगतान से रोकी गई है। उन्होंने कहा कि अब इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी और यदि कंपनी मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) का रास्ता अपनाती है, तो सरकार को पूर्ण विश्वास है कि वह कानूनी रूप से इस मामले में जीत दर्ज करेगी।

 

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रेगुलेटरी कमीशन को लेकर भी उठे सवाल

सदन में रेगुलेटरी कमीशन की नियुक्तियों को लेकर भी भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन तीन नामों पर विचार हो रहा है, वे उपयुक्त नहीं हैं। हालांकि उन्होंने सदन में नामों का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि वे इन नामों की जानकारी मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से उनके कक्ष में देंगे।

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