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August 9, 2025

हिमाचल में 100 रुपए प्रतिकिलो मिलेगा इस गेहूं का आटा, 115 में दलिया; सुक्खू सरकार ने तय किए दाम

सुक्खू सरकार ने 60 रुपए में खरीदी गेहूं, अब 100 रुपए प्रति किलो बेचेगी आटा

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Sukhu Govt wheat price

शिमला। हिमाचल प्रदेश में किसानों का रुझान अब पारंपरिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की नीतियों और प्रोत्साहनों के चलते इस बदलाव को और भी बल मिल रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक तरीके से उगाई गई गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की है और अब इससे निर्मित उत्पादों को शहरी क्षेत्रों में उचित दामों पर उपलब्ध करवाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

100 रुपए प्रतिकिलो बिकेगा गेहूं का आटा

कृषि विभाग द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि प्राकृतिक गेहूं से तैयार हिमभोग प्राकृतिक गेहूं आटा 100 रुपये प्रति किलो और हिमभोग प्राकृतिक दलिया 115 रुपये प्रति किलो की दर से शहरी राशन डिपो में बेचा जाएगा। यह पहल प्रदेश में पहली बार हो रही है, जिसमें सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत प्राकृतिक गेहूं की सीधी खरीद कर किसानों को सीधे लाभ पहुंचाया है।

 

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किसानों के खातों में पहुंचा 1.31 करोड़ रुपए

वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान प्रदेश सरकार ने 838 किसानों से 60 रुपये प्रति किलो की दर से 2,123 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद की। इस खरीद के एवज में किसानों के बैंक खातों में कुल 1.31 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके साथ ही गेहूं के परिवहन के लिए 4.15 लाख रुपये की राशि बतौर परिवहन उपदान भी स्वीकृत की गई है।

सरकार ने 60 रुपए प्रतिकिलो खरीदी थी गेहूं

सरकार की इस पहल के चलते किसानों को रासायनिक खेती के मुकाबले कहीं अधिक मूल्य मिल रहा है। जहां भारत सरकार द्वारा सामान्य गेहूं का MSP 24.25 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है, वहीं हिमाचल सरकार ने प्राकृतिक गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलो का MSP तय किया है। इस तरह प्रति किलो गेहूं पर किसानों को 35.75 रुपये का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो रहा है।

 

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अब मक्की और जौ भी प्राकृतिक तरीके से खरीदी जाएगी

सरकार द्वारा हिमभोग मक्की आटा पहले ही बाजार में उपलब्ध करवाया जा चुका है और अब गेहूं तथा दलिया भी उसी श्रेणी में शामिल किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पांगी क्षेत्र के किसानों से सितंबर के अंतिम सप्ताह से 40 टन प्राकृतिक जौ की खरीद भी 60 रुपये प्रति किलो की दर से की जाएगी। यह किसानों के लिए एक और बड़ा अवसर साबित होगा।

3 लाख किसानों ने लिया प्रशिक्षण

प्रदेश में अब तक 3.06 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में 38,437 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के तहत लाया गया है और 2.22 लाख किसान इस पद्धति को अपनाकर खेती कर रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष में सरकार का लक्ष्य एक लाख नए किसानों को इस प्रणाली से जोड़ने का हैए जिसमें अब तक 59,068 किसानों ने पंजीकरण कराया है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की सराहना

प्राकृतिक खेती को लेकर हिमाचल सरकार के प्रयासों की सराहना हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी की। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश में बढ़ रही प्राकृतिक खेती को एक सकारात्मक और स्थायी कृषि मॉडल करार दिया। अमित शाह ने कहा कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

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हिमाचल में प्राकृतिक खेती एक नई क्रांति की ओर बढ़ रही है। किसानों को न केवल बेहतर दाम मिल रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और रसायनमुक्त उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। सरकार की यह पहल भविष्य की खेती के लिए एक सशक्त आधार तैयार कर रही है और आने वाले समय में हिमाचल इस क्षेत्र में देश भर में एक उदाहरण बन सकता है।

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