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June 24, 2025
हिमाचल: पूर्व DGP पर आरोप लगाने वाले SP संजीव गांधी ड्यूटी पर लौटे, 29 दिन बाद हुई वापसी
सरकार ने अनुशासनहीनता पर लंबी छुट्टी पर भेजे थे संजीव गांधी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. अतुल वर्मा के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर मोर्चा खोलने वाले शिमला जिला के पुलिस अधीक्षक (SP) संजीव गांधी मंगलवार को 29 दिन बाद अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं। 27 मई को सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में लंबी छुट्टी पर भेजा था। साथ ही तत्कालीन डीजीपी अतुल वर्मा और एसीएस (गृह) ओंकार शर्मा को भी छुट्टी पर भेजा गया था। अब एसपी गांधी ने दोबारा अपना कार्यभार संभाल लिया है, जबकि ओंकार शर्मा पहले ही वापसी कर चुके हैं और अतुल वर्मा 31 मई को रिटायर हो चुके हैं।
यह पूरा विवाद हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत से शुरू हुआ। 10 मार्च को नेगी लापता हुए थे और 18 मार्च को उनका शव गोबिंदसागर झील ;बिलासपुरद्ध में मिला। मामले में शुरू में शिमला पुलिस ने जांच की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस केस की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। यह फैसला डीजीपी अतुल वर्मा और एसीएस ओंकार शर्मा की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट और एफिडेविट के आधार पर लिया गया।
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एसपी संजीव गांधी ने 24 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर् डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा के एफिडेविट को गैर.जिम्मेदाराना बताते हुए उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। गांधी ने कहा कि शिमला पुलिस को कई ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनमें तत्कालीन डीजीपी के आचरण को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी का स्टाफ ड्रग्स से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर संजीव भूरिया गैंग से मिला हुआ है।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस जांच में प्राप्त एक महत्वपूर्ण पेन ड्राइव को जानबूझकर छिपाया और फॉरमेट किया गया, जिससे साक्ष्य नष्ट हो गए। गांधी ने अपनी कॉन्फ्रेंस में न केवल डीजीपी को घेरा बल्कि मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और पूर्व डीजीपी संजय कुंडू को भी निशाने पर लिया।
इन खुलासों और आरोप.प्रत्यारोपों के बीच सरकार ने पूरे मामले को अनुशासनहीनता और आपसी टकराव के रूप में देखा। 27 मई को एसपी संजीव गांधी, डीजीपी अतुल वर्मा और एसीएस ओंकार शर्मा तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए छुट्टी पर भेज दिया था। एसपी शिमला का चार्ज तत्काल सोलन के एसपी गौरव सिंह को सौंपा गया था।
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अब जबकि संजीव गांधी ने दोबारा कार्यभार संभाल लिया है और ओंकार शर्मा भी लौट चुके हैं, मामले से जुड़े कई प्रश्न अभी भी अनसुलझे हैं। विमल नेगी की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई साजिश ? क्या पुलिस जांच में सचमुच साक्ष्य छिपाए गए? क्या पूर्व DGP के स्टाफ का आपराधिक गिरोहों से कोई संबंध था? CBI अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है और आने वाले समय में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। मगर यह घटना प्रशासनिक ढांचे के भीतर चल रही खींचतान और पारदर्शिता की गंभीर परीक्षा बन चुकी है।