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July 20, 2025

हिमाचल: कैंसर, डायबिटीज, बीपी और दर्द निवारक सहित 58 दवाओं के सैंपल फेल

एक ही उद्योग की तीन दवाएं निकली नकली, कैसे सुधरेगी मरीजों की सेहत

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Medicines Samples fail

शिमला। देशभर में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और राज्य औषधि नियंत्रक संस्थाओं द्वारा जारी जुलाई माह के ड्रग अलर्ट के अनुसार, भारत में निर्मित कुल 188 दवाएं गुणवत्ता मानकों पर असफल पाई गई हैं। इनमें से 59 दवाएं हिमाचल प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में तैयार की गई थीं।

सोलन जिला की 44 दवाओं के सैंपल फेल

इनमें सर्वाधिक 44 दवाएं सोलन जिले में निर्मित हुईं, जबकि 13 सिरमौर और एक-एक दवा कांगड़ा व ऊना जिले से संबंधित हैं। सैंपल जांच में यह दवाएं तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जिससे इनके प्रभावी और सुरक्षित उपयोग पर सवाल खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं जांच में तीन दवाएं नकली भी पाई गई है। यह तीनों दवाएं एक ही उद्योग में बनी हुई हैं।

गंभीर बीमारियों की दवाएं भी शामिल

रिपोर्ट के अनुसार गुणवत्ता जांच में असफल पाई गई दवाओं में एंटीबायोटिक, एंटी डायबेटिक, उच्च रक्तचाप, प्रोस्टेट कैंसर, पेट दर्द, दर्द निवारक, विटामिन B-12 और अन्य गंभीर बीमारियों में उपयोग की जाने वाली दवाएं शामिल हैं।

 

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इसके अलावा  कैंसर और त्वचा रोग (सोरायसिस) में इस्तेमाल होने वाले कुछ इंजेक्शन भी सैंपल परीक्षण में असफल पाए गए हैं। इनमें मिथोट्रेक्सेट इंजेक्शन-15 (जो अगस्त 2026 में एक्सपायर होने वाला है और मुंबई की बीडीएच इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा निर्मित है) और डोसिटैक्सल हाइड्रॉस आईपी (पेट और स्तन कैंसर में उपयोग, चीन की शंघाई बायोफार्मा कंपनी द्वारा निर्मित) शामिल हैं।

फेल हुई अन्य प्रमुख दवाएं

पैरासिटामोल, विटामिन C इंजेक्शन, रेबाप्राजोल, टेलमिसर्टन, पैंटाप्राजोल सोडियम इंजेक्शन, एमॉक्सीसिलिन और पोटेशियम क्लावुलैनेट जैसी आमतौर पर प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाएं भी गुणवत्ता परीक्षण में असफल पाई गई हैं।

 

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तीन नकली दवाएं 

जांच में तीन दवाएं पूरी तरह से नकली घोषित की गई हैं। इनमें शामिल हैं

  • टैक्सिम-ओ 200: गले, नाक और कान के संक्रमण में दी जाने वाली यह दवा जुलाई 2024 में बनी थी।
  • थ्रोम्बोफोब: रक्त के थक्के बनने से रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली यह दवा भी नकली पाई गई।
  • रोसूवास एफ-10: कोलेस्ट्रॉल कम करने में उपयोग होने वाली यह दवा भी फर्जी निकली।

इन दवाओं के निर्माणकर्ता उद्योगों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन जांच और कार्रवाई प्रक्रिया प्रगति पर है।

राज्य दवा नियंत्रक का बयान

राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि हिमाचल की कुल 59 दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर पाईं। उन्होंने कहा, “जुलाई माह के ड्रग अलर्ट में हिमाचल की दवाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। सभी संबंधित औद्योगिक इकाइयों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और निर्देश दिए गए हैं कि बाजार में मौजूद इन दवाओं को तुरंत वापस मंगवाया जाए।”

 

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की दवाएं न केवल मरीज के उपचार को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनकी सेहत को भी गंभीर खतरे में डाल सकती हैं। नकली और घटिया दवाओं की मौजूदगी देश की फार्मा इंडस्ट्री की साख पर भी सवाल खड़े कर रही है।

 

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