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August 23, 2025
कैंसर की चपेट में हिमाचल, दूसरे स्थान पर पहुंचा; सीएम सुक्खू ने बताया- सरकार क्या उठा रही कदम
आईजीएमसी और टांडा में शुरू की पीईटी स्कैन सुविधा
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शिमला। हरे-भरे पहाड़ों और स्वच्छ वातावरण के लिए प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। राज्य में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है और चिंता की बात यह है कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों के बाद आबादी के अनुपात में हिमाचल प्रदेश कैंसर रोगियों की संख्या में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह आंकड़े न केवल स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी हैं] बल्कि प्रदेश के नागरिकों की जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा सदन में जोरशोर से उठा। कांग्रेस विधायक राकेश कालिया और कुलदीप सिंह राठौर के संयुक्त सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन को बताया कि कैंसर के शुरुआती चरण में पहचान के लिए आधुनिकतम तकनीक लाई जा रही है।
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इसी दिशा में आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में इसी वर्ष PET स्कैन (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) सुविधा शुरू की जा रही है। इसके बाद अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी। सीएम ने कहा, "हमारी सरकार इस बीमारी की भयावहता को लेकर गंभीर है। प्रारंभिक पहचान ही इलाज की सबसे बड़ी कुंजी है, इसलिए हाईएस्ट लेवल टेक्नोलॉजी को लाया जा रहा है।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि हमीरपुर जिले में 300 करोड़ रुपये की लागत से एक विशेष कैंसर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है, जो विशेष रूप से कैंसर के शुरुआती चरण की पहचान और प्राथमिक उपचार पर केंद्रित होगा। सरकार इसमें विशेष बजट प्रावधान कर रही है ताकि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक भी सुलभ उपचार पहुंच सके।
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हिमाचल सरकार ने कैंसर रोग पर प्रभावी रणनीति बनाने के लिए देश के प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञों की एक राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया है। ये विशेषज्ञ नियमित बैठकें कर रहे हैं और प्रदेश में कैंसर की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे के कारणों, रोकथाम और इलाज की दिशा में रणनीति तैयार कर रहे हैं।
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कैंसर के मामलों में वृद्धि के पीछे एक बड़ा कारण कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग भी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि नॉन-ब्रांडेड कीटनाशकों और केमिकल्स का अंधाधुंध इस्तेमाल फसलों के माध्यम से इंसानी शरीर में पहुंच रहा है, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियां बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। सरकार इस पर भी नजर रखेगी कि अनधिकृत कंपनियों द्वारा नकली और हानिकारक कीटनाशक न बेचे जाएं।
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राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों की खरीद करने जा रही है, जिससे हिमाचल के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। इसका एक बड़ा उद्देश्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का समय रहते सटीक पता लगाना है।