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September 12, 2025
शराबियों ने भर दिया सुक्खू सरकार का खाली खजाना, जानें अब तक कितने करोड़ मिले और कितने बाकी
शिमला में 13,25,27,371 करोड़ की राशि बकाया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार शराब के ठेकों से बहुत कमाई कर रही है। प्रदेश में करीब 2100 ठेके हैं। हिमाचल में हर साल करोड़ों की शराब बिकती है। इससे सरकारी खजाना करोड़ों की आमद लेता है। आखिर सरकार शराब के ठेकों से कितनी कमाई करती है, ये प्रश्न एक विधायक ने पूछ ही लिया जिसका जवाब खुद मुख्यमंत्री ने दिया है।
हिमाचल प्रदेश के मॉनसून विधानसभा सत्र में बिलासपुर से विधायक त्रिलोक जमवाल ने राज्य कर एवं आबकारी विभाग से सवाल किया। इसमें विधायक ने पूछा कि प्रदेश में शराब नीति के अंतर्गत कितने कलस्टर ठेकेदारी के लिए दिए गए और इनसे कितनी धनराशि प्राप्त हो रही है।
साथ में ये भी पूछा गया कि इनसे कितना बकाया धनराशि प्राप्त होनी शेष है। विधायक ने ठेकेदार और फर्म के नाम सहित ब्यौरा देने को कहा। बीते दो सालों में 20 फरवरी 2025 तक वर्तमान शराब नीति से कुल राजस्व प्राप्ति और बकाया धनराशि का ब्यौरा मांगा गया था।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के पास है इसलिए उन्होंने इन प्रश्नों के उत्तर दिए और इससे जुड़ी जानकारी सबके सामने रखी। सीएम सुक्खू ने सदन में बताया कि 2024-25 में शराब के कुल 87 क्लस्टर ठेकेदारी के लिए दिए गए थे।
इन क्लस्टर की नीलामी 1795.06 करोड़ रुपए में की गई और इनसे 17.69.68 करोड़ की राजस्व वसूला गया। साल 2024-25 के लिए कुल बकाया 25,38 करोड़ की राशि शेष है। वहीं पिछले दो वर्षों में 31 मार्च 2025 तक 2023-24 में 26.31 करोड़ कमाए गए और इसमें 92.55 करोड़ बकाया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2776.41 करोड़ की आय हुई जबकि 25.38 करोड़ रुपए बकाया है। शिमला में सबसे अधिक 11 ठेकेदारों के पास बकाया राशि है। शिमला जिले में 11 ठेकेदारों के पास 13,25,27,371 करोड़ रुपए बकाया है।
शिमला के बाद कांगड़ा में 8 ठेकेदारों के पास 5,12,18,231 करोड़ का राशि शेष हैं। वहीं सोलन में 3 ठेकेदारों के पास 6,22,87,158 करोड़ रुपए बाकी हैं। सबसे कम किन्नौर में एक ठेकेदार के पास 51 लाख रुपए शेष हैं। वहीं, उना में एक कंपनी के पास 27,30,463 रुपए बकाया है।
प्रदेश में देसी और अंग्रेजी शराब की बोतलों पर 6 तरह के सेस लगते हैं। इसमें मिल्क सेस, गौ सेस, एंबुलेंस सर्विस फंड सेस, पंचायती राज इंस्टीट्यूशन सेस, प्राकृतिक खेती सेस शामिल हैं। विधवा और दिव्यांग माता-पिता के बच्चों को लेकर भी शराब पर सेस लगाया जाता है।
शराब पर लगे सेस से इक्ट्ठा हुई धन राशि को दूध से जुड़ी योजनाओं के विकास पर खर्च किया जाता है। सुक्खू सरकार ने 2023-24 में अपने पहले बजट के अंदर शराब की बोतल पर मिल्क सेस लगाने की शुरूआत की थी।
मिल्क से अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था। इस सेस के चलते देशी और विदेशी दोनों शराब की बोतलों पर 10 रूपये प्रति बोतल मिल्क सेस लिया जाता है। वहीं बीयर की बोतल पर सरकार 10 रूपये मिल्क सेस वसूल रही है।
वहीं प्राकृतिक खेती यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देसी शराब और अंग्रेजी शराब पर 2 और 5 रूपये प्रति बोतल प्राकृतिक सेस लिया जा रहा है। बता दें कि शराब कि बोतल पर प्राकृतिक खेती सेस इसी साल अप्रैल में शुरू हुआ है।