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November 27, 2025

LIC की पॉलिसी लेते वक्त बोला झूठ, जरूरत पड़ने पर नहीं मिली फूटी कौड़ी

सुप्रीम कोर्ट ने भी LIC के पक्ष में लिया फैसला

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LIC Insurance Policy

शिमला। अकसर लोग LIC की कोई भी पॉलिसी इसलिए खरीदते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें फायदा मिल सके। हालांकि कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं जिनमें ये बात उल्टी पड़ जाती है। पैसा निवेश करने के बावजूद जब जरूरत पड़ती है तो एप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाती है और ऐसा होता है एक झूठ की वजह से।

LIC ने रिजेक्ट कर दिया इंश्योरेंस क्लेम 

मामला साल 2013 का है जब महिपाल सिंह ने LIC से इंश्योरेंस कवर लिया। वहीं साल 2014 में उनकी मौत हो गई। जब महिपाल की पत्नी ने इंश्योरेंस क्लेम फाइल किया तो LIC ने इसे रिजेक्ट कर दिया। 

 

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महिपाल ने खुद को बताया था नशामुक्त

दरअसल महिपाल ने 2013 में LIC का जीवन आरोग्य हेल्थ प्लान लिया था। इस दौरान उन्होंने खुद को नशामुक्त बताया था। उन्होंने बताया कि वो शराब नहीं पीते, धूम्रपान नहीं करते और तंबाकू का भी सेवन नहीं करते। 

कार्डियेक अरेस्ट हो गई महिपाल की मौत

एक साल भी नहीं बीता था कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनके पेट में दर्द उठा और उन्हें उल्टियां हो रही थीं। एक महीने के करीब उनका इलाज चला और आखिर में कार्डियेक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

 

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इलाज के खर्चे का भुगतान हो गया रिजेक्ट

जब उनकी पत्नी ने इलाज के खर्चे के भुगतान के लिए इश्योरेंस क्लेम किया तो LIC ने क्लेम को रिजेक्ट कर दिया। LIC का कहना था कि अगर शराब के कारण स्वास्थ्य समस्या होती है तो उसके लिए इश्योरेंस का पैसा नहीं दिया जाता।

शराब पीने से हुई थी किडनी की बीमारी

मेडिकल रिपोर्ट्स से साफ था कि महिपाल खूब शराब पिया करते थे और उन्हें किडनी की गंभीर बीमारी हो गई थी। ऐसे में महिपाल की पत्नी ने LIC के खिलाफ उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया जहां फैसला उनके पक्ष में आया।

 

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सुप्रीम कोर्ट का LIC के पक्ष में है फैसला

ऐसे में LIC मामले को दूसरी शीर्ष अदालतों के पास लेकर गया और अंत में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला LIC के पक्ष में सुनाया और विधवा पत्नी के क्लेम को रिजेक्ट करने को सही ठहराया। कोर्ट ने मामले को लेकर 3 जरूरी बातें कही-

  1. शराब की लत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इंश्योरेंस लेने वाले को LIC को बताना चाहिए था क्योंकि इसका जोखिम आकलन पर प्रत्यक्ष प्रभाव होता है।
  2. ये सीधा-सीधा कार्य-कारण का मामला है। बहुत शराब पी जिससे उनका लीवर डैमेज हो गया। इसी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई।
  3. जीवन आरोग्य प्लान कैश बेनिफिट पॉलिसी ही है ना कि रीइंबर्समेंट स्कीम इसलिए क्लेम रिजेक्शन की शर्त यहां लागू होती है। 

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पॉलिसी लेने पर बिल्कुल ना बोलें झूठ

ऐसे में अगर आप भी जब कोई पॉलिसी खरीदें तो झूठ बोलने की गलती ना करें। जो जानकारी आपसे पूछी जाए- उसे सच-सच बताएं। अगर कोई ऐसी जानकारी है जिसकी चर्चा नहीं हुई है तो वो खुद से बता दें ताकि वक्त आने पर नुकसान ना हो।

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