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November 27, 2025
हिमाचल के बागवानों की बल्ले-बल्ले, अब 'सी-ग्रेड' सेब से भी होगी बंपर कमाई, जानें नई योजना
प्रदेश की सुक्खू सरकार की नई योजना बागवानों को करेगी मालामाल
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शिमला। हिमाचल के सेब बागवानों के लिए कुछ ऐसा होने जा रहा है, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी, सालों से घाटे का कारण बने "सी-ग्रेड" सेब अब बागवानों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बनने वाले हैं। वो सेब, जिसे अब तक बाजार में कोई पूछता नहीं था, वही सी-ग्रेड सेब अब बागवानों की किस्मत पलटने वाला है। अगले सीजन से शुरुआत होने वाली एक नई व्यवस्था इतनी बड़ी है कि बागवान खुद यकीन नहीं कर पा रहे। आखिर कैसे एक बेकार समझा जाने वाला सेब अचानक लाखों की कमाई का जरिया बन जाएगा, सच जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
हिमाचल सरकार ने बागवानों के लिए एक नई योजना तैयार की है, जिसमें उनके उन सेबों का भी सही इस्तेमाल होगा, जिन्हें अब तक कम क्वालिटी समझकर बाजार में ठीक दाम नहीं मिलते थे। ये वही सी-ग्रेड सेब हैं जो छोटे होते हैं, कम चमकीले होते हैं या दिखने में थोड़े खराब होते हैं। अब सरकार ने तय किया है कि बागवानी विभाग, उद्योग विभाग और निजी कंपनियां मिलकर इन सी-ग्रेड सेबों को खरीदेंगी।
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इस योजना के तहत बागवानी विभाग, उद्योग विभाग और निजी कंपनियों की साझेदारी से सी-ग्रेड सेब की प्रोसेसिंग की जाएगी। इन सेबों से जूस, जैम, जैली और स्क्वैश जैसे कई उत्पाद बनाए जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि समय पर सी-ग्रेड सेब बिकेगा और बागवानों को तुरंत इसका पैसा भी मिलेगा। जब सी-ग्रेड सेब बाजार में नहीं जाएंगे, तो अच्छे क्वालिटी वाले सेबों को और भी बेहतर दाम मिलेंगे। यानी एक तरफ कम क्वालिटी वाले सेब से भी कमाई होगी और दूसरी तरफ अच्छी क्वालिटी वाले सेब की कीमत भी बढ़ जाएगी।
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बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश स्टोन फ्रूट एसोसिएशन और संयुक्त किसान मंच के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद इस नई व्यवस्था को अगले सीजन से लागू करने के निर्देश हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के अधिकारियों को दे दिए हैं।
स्टोन फ्रूट एसोसिएशन के संस्थापक और अध्यक्ष दीपक सिंघा ने बताया कि साल 2019 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने ऊना में क्रीमिका फूड पार्क स्थापित किया था। इस फूड पार्क में सेब की प्रोसेसिंग के लिए 24 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। अगले सेब सीजन में इसी पार्क में 20 हजार मीट्रिक टन सेब की प्रोसेसिंग की जाएगी। बागवानी मंत्री ने एचपीएमसी के महाप्रबंधक को इस संबंध में जल्द कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के लिए बजट देना बंद कर दिया है। ऐसे में बागवानों को राहत देने के लिए निजी कंपनियों के सहयोग से सेब की प्रोसेसिंग ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने सरकार से माइक्रो प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने के लिए बागवानों को अनुदान (सब्सिडी) उपलब्ध करवाने की भी मांग की है।
दीपक सिंघा ने यह भी मांग की है कि प्रदेश सरकार स्टोन फ्रूट की प्रोसेसिंग करके भी प्रीमियम उत्पाद तैयार करे। मई से जून के दौरान एचपीएमसी के प्रोसेसिंग प्लांट में स्टोन फ्रूट के उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिससे बागवानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके। यह नई पहल हिमाचल के सेब उद्योग के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है, जिससे बागवानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और उन्हें अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा।