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January 9, 2026
हिमाचल में बहुत गरीब या गरीब परिवार ही BPL लिस्ट में- बाकी सब बाहर, बदलने जा रहा है सिस्टम
10 प्रतिशत लोगों का भी नहीं हो पाया दोबारा लिस्ट में सिलेक्शन
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे BPL और अंत्योदय सूचियों के पुनर्गठन ने ग्रामीण इलाकों में गहरी हलचल पैदा कर दी है। ऐसे में अब हिमाचल प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे BPL आने वाले परिवारों को लेकर सरकार एक नई और व्यापक व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है।
हाल ही में पूरे प्रदेश में किए गए BPL के नए सर्वे के बाद सामने आई तस्वीर ने सरकार को नीतिगत बदलाव पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। दरअसल, नए सर्वे के आधार पर सवा लाख के करीब परिवार BPL सूची से बाहर हो गए हैं। जबकि इनमें से कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति आज भी बेहद कमजोर बनी हुई है।
आपको बता दें कि प्रदेश सरकार अब BPL परिवारों को एक ही श्रेणी में रखने के बजाय दो अलग-अलग वर्गों में बांटने की योजना पर काम कर रही है। सरकार द्वारा बहुत गरीब परिवार और गरीब परिवार नाम से दो श्रणियां बनाई जा सकती हैं।
सरकार का मानना है कि ऐसा करने से उन परिवारों को राहत मिलेगी- जो तकनीकी या नए मापदंडों के चलते BPL सूची से बाहर हो गए हैं। वास्तविक रूप से अभी भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
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सरकार की मंशा है कि BPL सूची से बाहर हुए इन परिवारों को पूरी तरह योजनाओं से वंचित न किया जाए। उन्हें भी किसी न किसी रूप में आर्थिक मदद और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता रहे। इस नई व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज दोपहर बाद होने वाली एक अहम बैठक में ले सकते हैं।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में BPL परिवारों के चयन की प्रक्रिया इस बार नए सिरे से की गई है। प्रदेश की कुल 3564 ग्राम पंचायतों में से 782 पंचायतों में ग्रामसभा का कोरम पूरा होने पर BPL सूचियों को वहीं अंतिम रूप दिया गया।
वहीं, शेष 2782 पंचायतों में ग्रामसभा का कोरम पूरा न हो पाने की स्थिति में यह जिम्मेदारी खंड स्तरीय समितियों को सौंपी गई। इन समितियों ने निर्धारित मापदंडों के आधार पर सूचियों को अंतिम रूप दिया है। अब यह पूरी लिस्ट तैयार हो चुकी है और आज बैठक में इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
प्रदेश के लिए केंद्र सरकार की ओर से 2.82 लाख परिवारों को BPL सूची में शामिल करने का कोटा निर्धारित है। जब BPL चयन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, उस समय हिमाचल प्रदेश में करीब 2.65 लाख परिवार BPL सूची में दर्ज थे।
नए दिशा-निर्देश जारी होने के बाद सरकार को उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में पात्र परिवार आवेदन करेंगे। इसी क्रम में 2.15 लाख नए परिवारों ने BPL सूची में शामिल होने के लिए आवेदन किया। हालांकि, जब सख्त मापदंडों के तहत छंटनी की गई और अंतिम सूची तैयार हुई, तो BPL परिवारों की संख्या घटकर डेढ़ लाख से भी कम रह गई। इतनी बड़ी संख्या में परिवारों के बाहर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी और असंतोष का माहौल बन गया है।
BPL परिवारों की संख्या में आई इस भारी कमी ने सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर मापदंडों का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर उन परिवारों की चिंता भी है, जो सूची से बाहर होने के बाद सरकारी योजनाओं से वंचित हो सकते हैं। ऐसे में दो श्रेणियों वाली व्यवस्था को एक संतुलनकारी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।