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February 17, 2026

हिमाचल में डॉक्टरों का कमाल : बिना चीर-फाड़ कर बचाई 2 मरीजों की जान, PGI का झंझट खत्म

चमियाना अस्पताल में पैंक्रियाटाइटिस का आधुनिक उपचार

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chamiyana hospital

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला के चमियाना में स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अब उन्नत इलाज के लिए हिमाचल के मरीजों को प्रदेश से बाहर भटकने की जरूरत नहीं है। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने यहां दो जटिल पैंक्रियाटाइटिस मरीजों का बिना पेट चीरे सफल उपचार कर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई दी है। यह इलाज न सिर्फ तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि मरीजों के लिए सुरक्षित और तेज़ रिकवरी वाला भी साबित हुआ।

 

क्या थी मरीजों की गंभीर स्थिति


अस्पताल में भर्ती 30 वर्षीय महिला और एक पुरुष मरीज पैंक्रियाटाइटिस की जटिल अवस्था से जूझ रहे थे। इस बीमारी में अग्न्याशय में सूजन के कारण पेट के भीतर द्रव या मवाद जमा हो जाता है। महिला मरीज के पेट में इतना अधिक द्रव भर गया था कि उसका पेट दब गया और वह भोजन तक नहीं कर पा रही थी। लगातार उल्टियों के कारण उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। वहीं पुरुष मरीज के पेट में भी कई स्थानों पर द्रव जमा था, जिससे उसे खाने-पीने में गंभीर परेशानी हो रही थी।

 

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बिना ओपन सर्जरी किया गया इलाज


गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की टीम ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड यानी EUS गाइडेड सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी तकनीक का उपयोग कर दोनों मरीजों का इलाज किया। इस प्रक्रिया में एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड को एक साथ इस्तेमाल कर शरीर के अंदर की स्थिति को रियल टाइम में देखा जाता है। इसके जरिए पेट में जमा द्रव को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। सबसे खास बात यह रही कि इस पूरे इलाज में किसी तरह की ओपन सर्जरी नहीं करनी पड़ी, जिससे मरीजों का जोखिम कम हुआ और रिकवरी तेजी से हुई।

 

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डॉक्टरों की टीम का ने किया चमत्कार


यह सफल उपचार अस्पताल के प्रिंसिपल और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. बृज शर्मा के नेतृत्व में किया गया। उनकी टीम में डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. विशाल बोध, डॉ. आशीष चौहान, डॉ. जगरूप, डॉ. नवीन, डॉ. यशदीप, डॉ. नलिन सहित अन्य सहयोगी स्टाफ शामिल रहा। सभी के तालमेल और अनुभव के चलते दोनों मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी इलाज मिल सका। इलाज के बाद दोनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ पाए गए और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

 

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प्रदेश में ही मिलेगी सुपर स्पेशलिटी सुविधा


अब तक इस तरह के जटिल मामलों में मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ या अन्य बड़े मेडिकल संस्थानों में रेफर किया जाता था। लेकिन अब चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे समय, पैसे और मानसिक तनाव तीनों की बचत होगी।

 

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नई तकनीकों की शुरुआत से बढ़ी उम्मीदें


अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में हाल ही में कोलेंजियोस्कोपी जैसी उन्नत प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इस तकनीक से पित्त नलिकाओं की सीधी जांच, बड़ी पथरी को एंडोस्कोपिक तरीके से तोड़ना और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी लेना संभव हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धियां हिमाचल में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम हैं।

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