#अव्यवस्था
February 16, 2026
हिमाचल में स्मार्ट मीटर का एक और बड़ा झटका, 20 दिन का आया एक लाख बिजली बिल; उड़े होश
कांगड़ा में पहले खोखे का आया था 83 हजार बिजली बिल
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देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार की स्मार्ट मीटर योजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। स्मार्ट मीटर लगने के बाद लोगों को भारी भरकम बिल आने लगे हैं, जिसके चलते लोग अपने घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध कर रहे हैं। अत्याधिक बिजली बिल देख कर कई लोगों के होश उड़ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला अब कांगड़ा जिला के देहरा उपमंडल से सामने आया है। यहां एक व्यक्ति को मात्र 20 दिन का बिजली बिल एक लाख रुपए आया है।
दरअसल डाडासीबा के समीप ढोंटा गांव निवासी निशांत कुमार जो एक स्थानीय दुकानदार हैं, उस समय हैरान रह गए जब उनके घर में हाल ही में लगाए गए स्मार्ट मीटर ने महज 20 दिनों का बिजली बिल एक लाख रुपये से अधिक दिखा दिया। सामान्य घरेलू उपयोग के बावजूद इतनी भारी.भरकम राशि का बिल देखकर उनके होश उड़ गए। निशांत कुमार का कहना है कि उनके घर में केवल सामान्य उपकरण पंखे, लाइट, टीवी और सीमित घरेलू उपयोग ही होते हैं। ऐसे में लाख रुपये का बिल आना पूरी तरह असंभव है। उन्होंने तुरंत बढ़ल स्थित बिजली बोर्ड कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई।
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मामले की जानकारी मिलते ही विद्युत मंडल देहरा के अधिशासी अभियंता बलेश कुमार ने उपभोक्ता को आश्वस्त किया कि प्रथम दृष्टया यह तकनीकी त्रुटि प्रतीत होती है। विभागीय जांच में सामने आया कि स्मार्ट मीटर के डाटा ट्रांसमिशन या सिस्टम अपडेट के दौरान सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण असामान्य बिल जेनरेट हो गया था। जांच के बाद विभाग ने एक लाख रुपये का बिल दुरुस्त कर दिया और संशोधित बिल करीब 600 रुपये के आसपास निकला। राहत की सांस लेते हुए उपभोक्ता ने सही बिल जमा कर दिया।
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कांगड़ा जिले में दो दिन के भीतर सामने आया यह दूसरा मामला है। इससे पहले कांगड़ा जिला के जवाली क्षेत्र के बग्गा में भी एक बंद खोखे का 83 हजार रुपए बिजली बिल आया था। जिसने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर उपभोक्ता शिकायत न करे तो उसे अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में पहले ही स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध चल रहा है। लोगों का आरोप है कि नई व्यवस्था पारदर्शी और सटीक होने के बजाय उलझन और मानसिक तनाव का कारण बन रही है।
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सुक्खू सरकार की डिजिटल और स्मार्ट बिजली प्रबंधन की पहल अब राजनीतिक मुद्दा बनती दिख रही है। विपक्ष पहले से ही स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। ऐसे मामलों के सामने आने से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। विभाग की ओर से उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि यदि किसी को भी बिल में असामान्यता दिखे तो घबराएं नहीं और तुरंत शिकायत दर्ज करवाएं, ताकि समय रहते त्रुटि सुधारी जा सके। फिलहाल कांगड़ा से सामने आया यह मामला स्मार्ट मीटर योजना की जमीनी हकीकत और तकनीकी तैयारियों पर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।