#राजनीति
February 17, 2026
CM सुक्खू बोले- अभी कमियां गिनने का वक्त नहीं, हिमाचल के हक के लिए एकजुट हो विपक्ष
सीएम बोले– हक छीना गया तो चुप नहीं बैठेंगे
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शिमला। हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन था, लेकिन माहौल बजट से ज़्यादा सियासत से गरम दिखा। सदन में सवाल सिर्फ पैसों का नहीं था, सवाल था हिमाचल के हक का। राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी को लेकर जैसे ही नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति उठाई, CM ने भी दो टूक जवाब दिया यह कोई भीख नहीं, प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है। इसी के साथ सत्ता और विपक्ष के बीच तल्ख बहस की पटकथा तैयार हो गई।
आरडीजी पर CM का साफ संदेश: यह हक है, खैरात नहीं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में कहा कि विपक्ष खुद अजीब स्थिति में फंस गया है। एक ओर वह आरडीजी बंद होने के बाद आने वाले गंभीर हालात को समझ भी रहा है और दूसरी ओर उससे बचने की कोशिश कर रहा है। CM ने कहा कि प्रदेश के राजस्व हितों पर जब चोट होगी, तो सरकार चुप नहीं रह सकती।
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CM बोले- मैं विपक्ष की भी सुनता हूं और जनता की भी
CM ने बताया कि सरकार ने आरडीजी को लेकर विशेष सत्र बुलाने का आग्रह राजभवन से किया था, लेकिन उससे पहले ही विपक्ष राज्यपाल से मिल चुका था। इसके बाद बजट सत्र की घोषणा हुई। बंद कमरे में क्या बातचीत हुई, इसका अंदाजा सरकार को भी नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मुझे जिद्दी कहते हैं, लेकिन मैं विपक्ष की भी सुनता हूं और जनता की भी। प्रदेश के अधिकारों से समझौता किसी सूरत में नहीं होगा।
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प्रधानमंत्री के पास जाने को तैयार हैं
CM ने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे आरडीजी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के पास जाने को तैयार हैं, तो यह संकल्प प्रस्ताव अभी समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह वक्त आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि हिमाचल के लिए एकजुट होने का है। जनता की आवाज सरकार की प्राथमिकता है और इस लड़ाई को युद्ध की तरह लड़ा जाएगा।
BJP का वाकआउट और सियासी शोर
सत्र के दौरान भाजपा विधायकों ने कई बार काम रोको प्रस्ताव लाए और बाद में वाकआउट भी किया। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह वाकआउट खबर का विषय नहीं है। असली मुद्दा यह है कि 17 मार्च को केंद्र सरकार में बजट पास होना है और उससे पहले वित्त आयोग की सिफारिशें सामने आएंगी। इसी वजह से सरकार चाहती है कि संकल्प प्रस्ताव पारित कर केंद्र तक प्रदेश की आवाज पहुंचाई जाए।
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स्पीकर की रूलिंग से खुला चर्चा का रास्ता
सदन में रूलिंग देते हुए स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि यह मामला लोकहित से जुड़ा है। उन्होंने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2020 में भी राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन की कार्यवाही चली थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 102 के तहत संकल्प प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, इसलिए अभिभाषण के दौरान इस पर मतदान नहीं हो सकता।