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February 28, 2026
हिमाचल में यहां शिव और विष्णु एक साथ खेलते हैं होली, 18वीं शताब्दी से जुड़ा है इतिहास; जानें पूरी कहानी
रंगों की मस्ती, एकता और स्वाद के संग मनाते है होली
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मंडी। हिमाचल की वादियों में फाल्गुन की पूर्णिमा का मौसम आते ही मंडी शहर गुलाल और रंगों से सराबोर हो जाता है। यहां की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भक्ति और इतिहास का भी संगम है। 18वीं शताब्दी से जुड़ी इस परंपरा में राजा सूरज सेन के दुखद प्रसंग और भगवान राज माधो राय की भक्ति की कहानी छिपी है। जानिए कैसे शिव और विष्णु दोनों की भक्ति के रंग मंडी की गलियों में हर साल फूटते हैं और यह त्योहार लोगों को एकता और प्रेम के रंगों में रंग देता है।
बता दें कि होली की परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि उस समय राजा सूरज सेन के 18 पुत्रों की असामयिक मौत हो गई थी। इस गहरे दुःख में राजा ने अपना पूरा राज्य भगवान माधव राय को समर्पित कर दिया। तब से मंडी के लोग राज माधो राय को भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के रूप में पूजते हैं।
यही वजह है कि मंडी शिव और विष्णु भक्ति का अनोखा केंद्र बन गया है, और यहां की होली में दोनों परंपराओं का रंग झलकता है। फाल्गुन पूर्णिमा पर सबसे खास पल होता है जब राज माधो राय की पालकी मंदिर से निकलती है। यह पालकी चांदी और सोने से जड़ी होती है और उसमें विराजमान भगवान की मूर्ति को हजारों लोग घेरते हैं।
लोग पारंपरिक लोक गीत गाते हैं, नाचते हैं और पूरे शहर को गुलाल की बारिश में डुबो देते हैं। यह नजारा देखने लायक होता है, ऐसा कहीं और नहीं मिलता। शाम के समय पड्डल मैदान में होलिका दहन का आयोजन होता है। लोग अपने घरों से लकड़ियां और राख लेकर आते हैं और यह दहन अंधकार पर भक्ति और अच्छाई की जीत का प्रतीक बन जाता है।
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इस दिन मंडी की गलियों में सिर्फ रंग ही नहीं, बल्कि एकता, प्रेम और आस्था भी देखने को मिलती है। पारंपरिक पकवान जैसे भल्ले और बबरू का स्वाद इस उत्सव को और भी खास बना देता है।
उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने आदेश जारी किया है कि मंडी सदर, गोहर, सरकाघाट, थुनाग और कोटली उपमंडलों में 2 मार्च 2026 को स्थानीय अवकाश रहेगा। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय और शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे, जबकि 3 मार्च को यह सभी खुलेंगे।
इस प्रकार मंडी की होली सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह शहर की ऐतिहासिक भक्ति, संस्कृति और लोगों की एकता का प्रतीक है। राजा माधो राय की होली मंडी की पहचान बन चुकी है, और हर साल यह उत्सव हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।