#यूटिलिटी
February 25, 2025
हिमाचल: कानून की पैरवी करने वाले वकीलों को केंद्र के कानून पर ऐतराज
मंडी में निकाली रैली, कोर्ट का किया बहिष्कार, नारेबाजी
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल की छोटी काशी मंडी के वकीलों को केंद्र सरकार के प्रस्तावित एडवोकेट अधिनियम 1961 में संशोधन पर ऐतराज है। कोर्ट में कानून की पैरवी करने वाले वकीलों ने मंगलवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 का यह कहते हुए विरोध किया कि इससे उनके असहमति के अधिकार के छीने जाने का खतरा पैदा हो जाएगा। वकीलों ने विरोध में रैली निकाली, नारेबाजी की और केंद्र सरकार से प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने की मांग की।
जिला बार एसोसिएशन की अगुवाई में वकीलों ने डीसी मंडी को ज्ञापन भी सौंपा। एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 की धारा 35A वकील या वकीलों के संगठन को कोर्ट का बहिष्कार करने, हड़ताल करने या वर्क सस्पेंड करने से रोकती है। इसका उल्लंघन वकालत के पेशे का मिसकंडक्ट माना जाएगा और इसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। जबकि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, हड़ताल करने पर रोक नहीं है। इसे प्रोफेशनल मिसकंडक्ट माना जाता है। लोगों के सुझाव के लिए बिल का फाइनल ड्राफ्ट सामने रखा गया है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि यह काला कानून वकीलों के लिए कई समस्याएं पैदा करेगा। इसे देखते हुए अधिवक्ताओं ने इस संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग की।
बार एसोसिएशन की मांग है कि जैसे कृषि कानून वापस लिया गया, वैसे ही इसे भी वापस लिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वकील वर्ग पर कुठाराघात करने की कोशिश कर रही है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: सड़क पर पलटी कार, तो मदद को दौड़ पड़े MLA हंसराज, घायलों को निकाला बाहर
नए बिल में कानूनी व्यवसायी (धारा 2) की परिभाषा व्यापक बनेगी। इसमें कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस के साथ ही कार्पोरेट वकीलों, इन-हाउस परामर्शदाताओं, वैधानिक निकायों और विदेशी कानूनी फर्मों में कानूनी काम में लगे लोगों को भी कानूनी व्यवसायी माना जाएगा। जबकि कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस करने वालों को ही कानूनी व्यवसायी माना जाता है।
बिल में एक नई धारा 33A जोड़ी गई है। इसके मुताबिक अदालतों, ट्रिब्यूनल और अन्य प्राधिकरणों में वकालत करने वाले सभी वकीलों को उस बार एसोसिएशन में पंजीकरण कराना होगा। जहां पर वे वकालत की प्रैक्टिस करते हैं। इस तरह के कुछ नए प्रावधान संशोधन करके जोड़े जा रहे हैं।