#यूटिलिटी
April 3, 2026
हिमाचल में 1 लाख परिवार को मिलेगी फ्री बिजली, एक रुपया भी नहीं आएगा बिल- जानें
हिमाचल में बिजली सब्सिडी पर सरकार का नया पैमाना
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सब्सिडी व्यवस्था को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को राहत सीधे उनके बिजली बिल में नजर आएगी।
सरकार की नई नीति के तहत एक राशन कार्ड पर जुड़े दो मीटरों तक कुल 250 यूनिट बिजली मुफ्त देने का प्रावधान लागू कर दिया गया है। ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव शुभकर्ण सिंह की ओर से जारी निर्देशों के बाद हिमाचल प्रदेश स्टेट बोर्ड लिमेटड ने इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को साफ नियमों के अनुसार लाभ मिलेगा। एक उपभोक्ता को अधिकतम दो बिजली मीटरों पर कुल 250 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। यानी प्रत्येक मीटर पर 125 यूनिट तक जीरो बिल। यह सुविधा केवल एक राशन कार्ड से जुड़े अधिकतम दो मीटरों तक सीमित रहेगी।
अगर किसी उपभोक्ता के पास दो से ज्यादा मीटर हैं, तो सिस्टम अपने आपदो मीटर का चयन करेगा। इससे पहले कई उपभोक्ताओं में यह भ्रम था कि अलग-अलग मीटरों पर अलग-अलग सब्सिडी मिलेगी, लेकिन अब सरकार ने इसे पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को अतिरिक्त राहत देते हुए बड़ा कदम उठाया है। पात्र परिवारों की पहचान संबंधित विभाग करेगा और उनकी सूची बिजली बोर्ड को भेजी जाएगी, ताकि सही लोगों तक लाभ पहुंचे।
सरकार ने बिलिंग सिस्टम को भी पारदर्शी बनाया है-
यानी अगर खपत 125 यूनिट से ज्यादा हो जाती है, तो आगे की पूरी यूनिट पर सामान्य दर से बिल देना होगा। इससे उपभोक्ताओं को बिजली बचाने की प्रेरणा भी मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपनी कंज्यूमर ID को राशन कार्ड से लिंक नहीं किया है उन्हें सब्सिडी का लाभ लेने के लिए यह प्रक्रिया जल्द पूरी करनी होगी। बिना लिंकिंग के फ्री बिजली का लाभ नहीं मिल पाएगा।
जिन घरों या परिसरों में कई मीटर लगे हैं, उनके लिए भी सरकार ने नियम तय किए हैं-
सरकार ने कृषि क्षेत्र को भी राहत देते हुए सब्सिडी जारी रखी है। 0 से 20 KVA तक कनेक्शन पर दर- 5.03 रुपये प्रति यूनिट, जिसमें 4.73 रुपये सब्सिडी मिलेगी। यानी किसान को सिर्फ 30 पैसे प्रति यूनिट का भुगतान और फिक्स्ड चार्ज 105 रुपये प्रति माह देना होगा। यह कदम खेती की लागत कम करने और किसानों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस नई नीति से आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा-