#विविध
April 3, 2026
हिमाचल में शराब की बोतल बोलेगी अपना दाम! QR कोड से खुलेगा राज, वसूली का खेल होगा खत्म
बोतलों की ओवरचार्जिंग पर अब लगेगा लगाम
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में आबकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने नई नीति के तहत शराब की हर नई बोतल पर QR कोड प्रणाली अनिवार्य कर दी है।
यह व्यवस्था 31 मार्च के बाद तैयार और पैक किए गए सभी नए स्टॉक पर लागू हो चुकी है। जिसके बाद बिना QR कोड वाली नई बोतलों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।
नई प्रणाली के तहत अब हर शराब की बोतल पर एक यूनिक क्यूआर कोड लगाया जा रहा है। जैसे ही कोई उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन से इस कोड को स्कैन करेगा, उसे उस बोतल से जुड़ी पूरी जानकारी तुरंत मिल जाएगी।
इसमें MRP, निर्माण तिथि, बैच नंबर, निर्माता कंपनी का नाम, वैधता अवधि और लाइसेंस से संबंधित विवरण शामिल होंगे। पहले यह जानकारी केवल बोतल के लेबल पर लिखी होती थी, जिसे लेकर कई बार छेड़छाड़ और ओवरचार्जिंग की शिकायतें सामने आती थीं। अब डिजिटल सत्यापन के जरिए उपभोक्ता खुद मौके पर ही सही कीमत का पता लगा सकेंगे।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य उपभोक्ताओं को ठगी से बचाना है। अब QR कोड स्कैन करने पर जो कीमत दिखाई देगी, वही अंतिम और मान्य मानी जाएगी। अगर कोई ठेका संचालक इससे अधिक राशि वसूलता है, तो ग्राहक उसके खिलाफ सबूत के साथ तुरंत शिकायत दर्ज कर सकता है।
नई डिजिटल प्रणाली से आबकारी विभाग को भी बड़ी राहत मिलेगी। विभागीय टीमें अब निरीक्षण के दौरान मौके पर ही बोतलों को स्कैन कर उनकी जानकारी जांच सकेंगी। इससे स्टॉक की निगरानी आसान होगी और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
हर बोतल का डिजिटल रिकॉर्ड बनने से पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखना आसान हो जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन-सी बोतल कहां से आई और किस ठेके तक पहुंची। यह कदम खासतौर पर उन मामलों में कारगर साबित होगा, जहां नकली शराब के कारण लोगों की जान को खतरा होता है।
इस पहल से अवैध और नकली शराब के कारोबार पर भी बड़ी चोट पड़ेगी। QR कोड के जरिए संदिग्ध या फर्जी बैच की पहचान तुरंत हो सकेगी। अगर कोई बोतल सिस्टम में दर्ज नहीं होगी या उसकी जानकारी संदिग्ध होगी, तो उस पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
नई व्यवस्था केवल उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि शराब उत्पादक कंपनियों के लिए भी फायदेमंद है। अब उन्हें बार-बार लेबल बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कीमत में बदलाव होने पर वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ही एमआरपी अपडेट कर सकेंगे, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. राजीव डोगरा ने जानकारी दी है कि 31 मार्च के बाद तैयार होने वाले सभी नए स्टॉक पर यह नियम सख्ती से लागू रहेगा। हालांकि, पहले से बाजार में मौजूद पुराने स्टॉक को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा, ताकि व्यापार और सप्लाई में कोई बाधा न आए।