#यूटिलिटी
February 1, 2026
हिमाचल में 75 लाख की आबादी के पास 24 लाख से अधिक वाहन, तीन साल में 3 लाख हुए पंजीकृत
हर तीसरे के पास वाहन, बढ़ रहा ट्रैफिक दबाव
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शिमला। छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में ट्रैफिक की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सीमित सड़कों और पहाड़ी भूगोल के बीच वाहनों की बेतहाशा बढ़ती संख्या ने शहरों से लेकर कस्बों तक जाम को आम कर दिया है। पर्यटन सीजन के दौरान हालात और भी बिगड़ जाते हैं-जब स्थानीय आबादी के साथ-साथ बाहरी वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
लगभग 75 लाख की आबादी वाले प्रदेश में हर तीसरे व्यक्ति के पास वाहन होना ट्रैफिक संकट की असली तस्वीर बयां करता है। सड़कों पर वाहनों की संख्या दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ती जा रही है। कई परिवारों में तो एक से ज्यादा, यानी दो-तीन वाहन तक मौजूद हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 के बाद से प्रदेश में वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
परिवहन विभाग की जानकारी के अनुसार, साल 2016 में प्रदेश में कुछ 12 लाख 37 हजार 128 वाहन पंजीकृत थे। इसके बाद वाहनों की रफ्तार इतनी तेज रही कि वर्ष 2022 तक यह संख्या बढ़कर 21 लाख 6 हजार 438 हो गई। वहीं 20 जनवरी 2026 तक प्रदेश में कुल वाहनों की संख्या 24 लाख 48 हजार 291 तक पहुंच चुकी है। यानी पिछले कुछ ही सालों में लाखों नए वाहन सड़कों पर उतर आए हैं।
अगर हाल के वर्षों की बात करें तो सिर्फ तीन साल में ही करीब 3 लाख 41 हजार नए वाहन पंजीकृत हुए हैं, जबकि बीते 11 वर्षों में वाहनों की संख्या में करीब 12 लाख 11 हजार का इजाफा हुआ है। वाहनों की बढ़ती संख्या के पीछे लोगों की आमदनी में बढ़ोतरी एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
इसके अलावा गांव-गांव तक सड़क का पहुंचना भी इसकी अहम वजह है। अब लोग पहले की तुलना में वाहन खरीदना ज्यादा आसान और जरूरी समझने लगे हैं। सरकार भी अब लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर प्रेरित कर रही है, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके।
सड़कों की स्थिति की बात करें तो लोक निर्माण विभाग के मुताबिक प्रदेश के 3644 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जा चुका है। पूरे प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई करीब 43 हजार किलोमीटर है। सड़क नेटवर्क बढ़ने से लोगों की आवाजाही तो आसान हुई है, लेकिन इसके साथ ही वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।
हादसों को और कम करने के लिए सरकार ने अब सड़क सुरक्षा को स्कूलों के सिलेबस में शामिल कर दिया है। प्रदेश में 18 साल की उम्र पूरी होते ही युवा ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते हैं, ऐसे में सरकार चाहती है कि बच्चों को स्कूल से ही ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा की सही जानकारी मिल सके। माना जा रहा है कि अगर युवाओं को शुरुआत से ही नियमों की समझ होगी तो भविष्य में हादसों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
इसके साथ ही परिवहन विभाग को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाया जा रहा है। अब लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, टैक्स जमा करने, वाहन पंजीकरण और पासिंग जैसी सुविधाएं ऑनलाइन मिलेंगी। वाहन पासिंग के लिए आवेदन भी ऑनलाइन होगा और प्रक्रिया मैनुअल नहीं रहेगी।
लाइसेंस से जुड़ी सेवाएं भी धीरे-धीरे पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही हैं। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के अनुसार मार्च तक परिवहन विभाग को पूरी तरह आधुनिक बना दिया जाएगा, जिससे लोगों को काफी सुविधा मिलेगी और कामकाज में पारदर्शिता आएगी।