#यूटिलिटी
January 23, 2026
सुक्खू सरकार ने पलटा एक और फैसला : अब पुलिस वालों को नहीं बनवाना होगा हिम कार्ड, जानें वजह
ID कार्ड और मैनुअल पास दिखाकर सफर कर सकेंगे पुलिस वाले
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अपना एक और फैसला पलट दिया है। CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवानों को बड़ी राहत देते हुए HRTC बसों में यात्रा से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है।
अब HRTC बसों में हिमाचल पुलिसवालों के लिए मुफ्त यात्रा पहले जैसी ही आसान कर दी है। यानी हिमाचल पुलिस के जवानों के लिए सुक्खू सरकार ने फ्री ट्रैवल पॉलिसी में बदलाव करने का फैसला पलट दिया है।
पुलिसकर्मियों को सरकारी बसों में सफर करने के लिए अलग से डिजिटल हिम बस कार्ड बनवाने की अनिवार्यता नहीं होगी। यह निर्णय पुलिस बल की कार्यप्रणाली को सरल बनाने और उन पर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ को खत्म करने के उद्देश्य से लिया गया है।
CM सुक्खू ने कहा कि राज्य में कॉन्स्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मी पहले ही अपने वेतन से तयशुदा राशि हर महीने HRTC को देते हैं। ऐसे में उनसे दोबारा डिजिटल कार्ड के नाम पर शुल्क लेना न्यायसंगत नहीं है।
सरकार का मानना है कि जो सुविधा पहले से वेतन कटौती के माध्यम से दी जा रही है, उसके लिए अतिरिक्त भुगतान की बाध्यता नहीं होनी चाहिए। अब पुलिस जवान बसों में यात्रा के दौरान अपना विभागीय पहचान पत्र (ID कार्ड) और मैनुअल पास दिखाकर सफर कर सकेंगे।
परिवहन निगम और बस स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि इन्हें पूरी तरह वैध दस्तावेज माना जाए और किसी भी पुलिसकर्मी को रोका या परेशान न किया जाए। इससे ड्यूटी पर जा रहे जवानों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होगी।
सरकार ने यह भी माना है कि पुलिस को रोजमर्रा की ड्यूटी, जांच, कानून-व्यवस्था और आपात स्थितियों के चलते प्रदेशभर में लगातार यात्रा करनी पड़ती है। डिजिटल वेरिफिकेशन या तकनीकी औपचारिकताओं के कारण अगर उन्हें बार-बार रुकना पड़े, तो इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है बल्कि काम की गति भी प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह छूट दी गई है।
इस फैसले से राज्य के हजारों पुलिसकर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें अब न तो नए कार्ड बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे और न ही अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ेंगे। सरकार के इस कदम को पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने वाला और जमीनी हकीकत को समझते हुए लिया गया व्यावहारिक फैसला माना जा रहा है।