#यूटिलिटी
February 17, 2025
अमेरिका से डिपोर्ट हुआ 19 वर्षीय हिमाचली युवक, 22 दिन पहले ही पहुंचा था
एजेंट की धोखाधड़ी का शिकार हुआ युवक, 45 लाख भी गंवाएं
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नाहन। हिमाचल के पड़ोसी राज्य पंजाब के अमृतसर में बीती रात को अमेरिका का विमान अवैध भारतीय प्रवासियों के तीसरे जत्थे को लेकर पहुंचा। इस विमान में 112 अवैध प्रवासियों को भारत डिपोर्ट किया गया। जिसमें हरियाणा से 44, गुजरात से 33, पंजाब से 31, उत्तर प्रदेश से 2 और उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश से 1.1 व्यक्ति शामिल है। इस तरह से अमेरिका से आए तीन जहाजों में हिमाचल के दो युवाओं को डिपोर्ट किया गया है। दूसरे और तीसरे जत्थे में एक एक हिमाचली डिपोर्ट हुआ है।
अमेरिका से डिपोर्ट हुआ हिमाचल का युवक मात्र 19 साल का है और अभी 25 जनवरी 2025 को ही वह अमेरिका पहुंचा था। यह युवक हिमाचल के सिरमौर जिला के कालाअंब क्षेत्र के गुमटी गांव का रहने वाला है। युवक का नाम रितेश बताया जा रहा है। रितेश के परिजनों को एक एजेंट ने विदेशी दवा कंपनी में नौकरी का झांसा देकर अमेरिका पहुंचाया था। इसके लिए उसने अलग अलग तरीके से 45 लाख रुपए लिए थे।
एजेंट ने रितेश को डंकी रास्ते से अमेरिका पहुंचाया था। जिसके लिए उसे पहले कई अन्य देशों में ले जाया गया, इस दौरान उसके परिजनों को टॉर्चर कर उनसे कई बार पैसों की डिमांड की गई। हैरानी की बात यह है कि यह सारा पैसा नगद लिया गया है। जिसे परिजनों ने हरियाणा के नारायणगढ़ में एजेंट द्वारा बताए गए स्थान पर सौंपा। परिजनों ने बेटे की सलामती के लिए किस्तों में 45 लाख की राशि गंवा दी है।
रितेश के पिता शमशेर सिंह एक शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि रितेश बीफार्मा कर रहा था। इसी बीच वह एक एजेंट के संपर्क में आया। एजेंट ने मुंबई में अमेरिका की एक दवा कंपंनी में नौकरी लगवाने की बात कही। उसने यह भी बताया कि कुछ समय बाद उसे अमेरिका भेज दिया जाएगा।
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रितेश के परिजनों ने एजेंट के कहने पर बेटे को 23 अगस्त 2024 को मुंबई में अमेरिका की दवा कंपनी में नौकरी के लिए भेज दिया। उसके कुछ ही दिनों बाद एजेंट ने बताया कि उनके बेटे का वर्क वीजा लग गया है और उसे अमेरिका भेजा जा रहा है। अब वह वहीं नौकरी करेगा।
पिता शमशेर सिंह ने बताया कि उसके बाद उनके बेटे को अलग अलग देशों में ले जाया गया और उसे टॉर्चर किया। वहां से पैसों की मांग की जाती रही। पिता ने बताया कि मैंने सबसे पहले उनकी डिमांड पर 20 लाख रुपए, उसके बाद 10 लाख, सात लाख, तीन लाख और पांच लाख रुपए अलग अलग समय पर उन्हें दिए गए। इसके लिए आसपड़ोस रिश्तेदारों और बैंक से लोन लेकर उनकी डिमांड को पूरा किया।
शमशेर सिंह ने बताया कि उनका बेटा किसी तरह 25 जनवरी को अमेरिका में दाखिल हुआ था, लेकिन अब 22 दिन बाद ही उसे डिपोर्ट कर दिया गया है। उनका बेटा सही सलामत अमृतसर पहुंच गया है और रोपड़ में अपने एक रिश्तेदार के यहां ठहरा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस अधीक्षक सिरमौर एनएस नेगी ने बताया कि सरकार की ओर से युवक के आने की जानकारी मिली थी। पुलिस की टीम अमृतसर भेजी गई है।
बड़ी बात यह है कि अमेरिका से डिपोर्ट किए जा रहे अवैध प्रवासियों को बेड़ियों में जकड़ कर भारत पहुंचाया जा रहा है। उनके हाथों में हड़कड़ी और पैरों में जंजीरें बांधी जाती हैं। जिन्हें भारत में जहाज से उतारने से पहले खोला जाता है।