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June 19, 2026

हिमाचल की 'किन्नर कैलाश यात्रा' पर 'देववाणी' का संकट, पूर्ण प्रतिबंध के आदेश, क्या इस बार नहीं होगी?

दो गांवों के अराध्य देवों ने यात्रा के पूर्ण प्रतिबंध के दिए आदेश, लोगों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन

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kinnaur kailash yatra

रिकॉन्गपिओ (किन्नौर)। धार्मिक आस्था और अगाध श्रद्धा की प्रतीक हिमाचल प्रदेश की पवित्र किन्नर कैलाश यात्रा को लेकर इस बार पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है। स्थानीय देव आस्था और सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित यह दुर्गम यात्रा इस बार शुरू होने से पहले ही पूरी तरह से विवादों के घेरे में आ गई है। इस बड़े विवाद की मुख्य वजह देववाणी (देवताओं का आदेश) है। क्षेत्र के दो प्रमुख गांवों के आराध्य देवताओं ने इस यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही है] जिसके बाद दोनों गांवों के आक्रोशित ग्रामीण अपनी मांग को लेकर सीधे प्रशासन के सामने आ खड़े हुए हैं।

देववाणी से मचा हड़कंप:  यात्रा रोकने के कड़े निर्देश

1 जुलाई से आधिकारिक तौर पर शुरू होने वाली इस यात्रा के खिलाफ पोवारी और रिब्बा गांव के स्थानीय लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। दरअसल, पोवारी गांव के कुलदेवता 'परका शंकर' और रिब्बा गांव के कुलदेवता 'कसूराज' ने देववाणी (गुर के माध्यम से) के जरिए कड़ा आदेश जारी किया है कि किन्नर कैलाश यात्रा को इस बार पूरी तरह से बंद किया जाए। देवताओं के इस आदेश के बाद देव समाज पूरी तरह से यात्रा को रुकवाने के पक्ष में आ गया है।

 

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गंदगी और अनियंत्रित भीड़ से नाराज हैं देवता

स्थानीय ग्रामीणों और देव समाज का कहना है कि हर साल होने वाली इस यात्रा के कारण क्षेत्र की पवित्रता और नाजुक प्राकृतिक संतुलन पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी धर्म सिंह सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि यात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर गंदगी फैलाई जा रही है, जिससे पीने के पानी के स्रोत दूषित हो रहे हैं और दुर्लभ जड़ी-बूटियों व पौधों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसी अनियंत्रित भीड़, गंदगी और प्रकृति से खिलवाड़ को लेकर स्थानीय देवताओं ने अपनी गंभीर नाराजगी जताई है और माहौल खराब होने से बचाने के लिए यात्रा न करवाने का हुक्म दिया है।

 

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डीसी किन्नौर को सौंपा ज्ञापन

इस संवेदनशील मसले को लेकर रिब्बा और पोवारी के सैकड़ों ग्रामीण अपनी मांगों के साथ उपायुक्त (डीसी) किन्नौर से मिलने पहुंचे और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। डीसी किन्नौर ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रशासन इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर पहले ही राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है और अब ग्रामीणों की मांगों पर नए सिरे से मंथन किया जाएगा। उपायुक्त ने साफ किया कि स्थानीय लोगों की देव आस्था को किसी भी कीमत पर ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी।

प्रशासन के लिए चुनौती बनी स्थिति

किन्नौर प्रशासन के सामने इस समय एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी यात्रा है तो दूसरी ओर स्थानीय देव परंपराओं और ग्रामीणों की मांगें हैं। प्रशासन लगातार विभिन्न पक्षों के साथ संवाद कर स्थिति का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं और देव आस्था का पूरा सम्मान किया जाएगा तथा कोई भी निर्णय सभी पक्षों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

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पूर्ण प्रतिबंध या निकलेगा कोई मध्य मार्ग?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस वर्ष किन्नर कैलाश यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा या फिर प्रशासन और देव समाज के बीच किसी सहमति के आधार पर सीमित या सशर्त यात्रा की अनुमति दी जाएगी। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और चर्चाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस फैसले का असर न केवल हजारों श्रद्धालुओं बल्कि पूरे किन्नौर क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

आस्था, परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

किन्नर कैलाश यात्रा को लेकर उपजा यह विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि धार्मिक पर्यटन, स्थानीय आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल देववाणी के बाद शुरू हुई यह बहस पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है और सभी को प्रशासन के अगले कदम का इंतजार है।

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