राजनीति

#धर्म

August 9, 2026

आज सावन का दूसरा सोमवार : बन रहा महा-संयोग...4 राशियों को मिलेगा अपार पैसा

सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा दुर्लभ संयोग

Add

News4himachal

as a

Trusted Source on

Google

शेयर करें:

sawan-second-monday-10-august-2026-shivling-jalabhishek-puja-vidhi-shubh-muhurat-rashi

शिमला। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार 10 अगस्त यानी आज सावन का दूसरा सोमवार है।

बन रहा दुर्लभ संयोग

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज के दिन ग्रहों की स्थिति भी विशेष मानी जा रही है। सूर्य और बुध ग्रह कर्क राशि में एक साथ स्थित रहेंगे- जिससे बुधादित्य योग का निर्माण होगा।

यह भी पढ़ें-हिमाचल : थाने के पास कांड- पहले चोरों ने लूटी दुकान, फिर शटर पर अपना ताला जड़ हुए फरार

कुछ राशियों के लिए फलदायी

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। जबकि बुध बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और निर्णय क्षमता से जुड़े ग्रह हैं। ऐसे में दोनों ग्रहों की युति को कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ राशियों के जातकों को करियर, आर्थिक स्थिति, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं।

  • वृषभ राशि
  • बुधादित्य योग को साहस और पराक्रम से जुड़े क्षेत्र में प्रभावशाली माना जा रहा है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है।
  • अपने फैसले अधिक मजबूती के साथ ले सकते हैं।
  • भाई-बहनों के साथ संबंधों में सहयोग की स्थिति बन सकती है।
  • लंबे समय से अटके हुए किसी काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
  • नौकरी करने वाले लोगों को अपने काम और प्रदर्शन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।
  • नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी की तलाश कर रहे लोगों के लिए भी समय सकारात्मक रह सकता है।
  • मेहनत और सही रणनीति के दम पर नए अवसर प्राप्त होने की संभावना बन सकती है।

यह भी पढ़ें- अग्निवीर भर्ती के नाम पर ठगी - हिमाचल से दबोचे 2 आरोपी, फेल युवाओं को बनाते थे निशाना

  • कर्क राशि
  • यह ग्रह संयोग विशेष महत्व रखता है- क्योंकि सूर्य और बुध इसी राशि में एक साथ मौजूद रहेंगे।
  • ज्योतिषीय दृष्टि से इससे व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना मानी जा रही है।
  • कार्यस्थल पर आपकी बात को महत्व मिल सकता है।
  • वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों के बीच आपकी छवि मजबूत हो सकती है।
  • समाज में मान-सम्मान बढ़ने के भी संकेत हैं।
  • व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • किसी नए ग्राहक, कारोबारी संपर्क या बड़े सौदे से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।
  • किसी भी बड़े आर्थिक निर्णय में जल्दबाजी करने के बजाय परिस्थितियों का अच्छी तरह आकलन करना बेहतर रहेगा।

यह भी पढ़ें : चंबा हाद*से में बड़ा खुलासा : ड्राइवर ने बताई थी बस में खराबी, नहीं मिली मदद- जारी रखा सफर

  • कन्या राशि
  • बुधादित्य योग लाभ भाव में बनने की स्थिति में है।
  • ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध आय, लाभ और आर्थिक उपलब्धियों से होता है।
  • धन संबंधी मामलों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं।
  • पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।
  • व्यापार करने वाले लोगों को पुराने संपर्कों या पहले किए गए किसी सौदे से फायदा मिल सकता है।
  • आय के नए साधन विकसित करने के प्रयास भी सफल हो सकते हैं।
  • बड़े भाई-बहनों या अनुभवी लोगों का सहयोग मिलने से किसी महत्वपूर्ण काम को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
  • नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन मिलेगा।
  • करियर में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।

यह भी पढ़ें- चंबा हाद*सा : बस ने कई बार खाए पलटे- सुष्मिता ने नहीं छोड़ा सीट का हैंडल, बताई आपबीती

  • वृश्चिक राशि
  • बुधादित्य योग भाग्य भाव से जुड़ रहा है।
  • लंबे समय से रुके कार्यों में गति आने की संभावना है।
  • जिन कामों के लिए काफी समय से प्रयास किया जा रहा था, उनमें सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
  • उच्च शिक्षा की योजना बना रहे विद्यार्थियों के लिए भी समय अनुकूल हो सकता है।
  • पढ़ाई से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने या किसी नए अवसर की तलाश में सफलता मिल सकती है।
  • धार्मिक यात्रा या लंबी दूरी की यात्रा का अवसर भी बन सकता है।
  • करियर के क्षेत्र में पदोन्नति
  • नई जिम्मेदारी या बेहतर अवसर मिलने के संकेत हैं।
  • आर्थिक स्थिति में भी धीरे-धीरे मजबूती आने की संभावना है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : नशे के खिलाफ पंचायत प्रधान ने उठाई आवाज, तस्करों ने बरसाए लात-घूंसे

पूजा का शुभ समय

आज सावन सोमवार के दिन पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन मुहूर्तों में पूजा कर सकते हैं।

  • सावन सोमवार पूजा मुहूर्त- सुबह 5:47 बजे से 7:27 बजे तक
  • दूसरा शुभ समय- सुबह 9:07 बजे से 10:47 बजे तक
  • सोम प्रदोष पूजा मुहूर्त- शाम 7:05 बजे से रात 9:14 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया- सुबह 5:47 बजे से 7:27 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया- सुबह 9:07 बजे से 10:46 बजे तक
  • शाम का अमृत चौघड़िया- शाम 5:25 बजे से 7:05 बजे तक

यह भी पढ़ें : हिमाचल में 500 पदों पर भर्ती : दसवीं पास को भी मिलेगी नौकरी, एक क्लिक में जानें सबकुछ

कैसे करें शिवलिंग का जलाभिषेक?

सावन सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने की विशेष परंपरा है। पूजा शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद शिवलिंग के सामने बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें।

जलाभिषेक की सरल विधि

  • महादेव का स्मरण करें- सबसे पहले शिवलिंग के सामने बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक पूजा का संकल्प लें।
  • अभिषेक का जल तैयार करें- एक स्वच्छ पात्र में साफ जल लें। इसमें श्रद्धानुसार गंगाजल की कुछ बूंदें मिला सकते हैं।
  • पंचामृत से अभिषेक करें- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार कर भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है। परंपरा के अनुसार कुछ भक्त इसमें गन्ने का रस भी शामिल करते हैं।
  • शिवलिंग पर अभिषेक करें- पंचामृत या तैयार पूजन सामग्री को शिवलिंग पर धीरे-धीरे अर्पित करें। इसके बाद साफ जल और गंगाजल से शिवलिंग का दोबारा अभिषेक करें।
  • पूजन सामग्री अर्पित करें- शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल, अक्षत, तिल और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय विशेष सावधानी रखें कि पत्ते साफ और साबुत हों।
  • मंत्र जाप करें- अभिषेक के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर सकते हैं।
  • आरती करें-
  • पूजा पूरी होने के बाद दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : फोन की लत...मां और नानी ने डांटा, नाराज हो कमरे में गई 11 साल की लड़की, और...

जलाभिषेक के समय कौनसा मंत्र पढ़ें?

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय श्रद्धालु नीचे दिए मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं। इस मंत्र के साथ भगवान शिव को जल अर्पित करने की धार्मिक परंपरा है। जिन लोगों को संस्कृत मंत्रों का उच्चारण कठिन लगता है- वे श्रद्धापूर्वक **'ॐ नमः शिवाय'** का जाप करते हुए भी जलाभिषेक कर सकते हैं। या फिर ये मंत्र-

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्। तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि॥

जलाभिषेक के बाद क्या करें?

जलाभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र और फूल अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को धूप और दीप दिखाएं। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में दान भी कर सकते हैं। पूजा के अंत में शिव परिवार का ध्यान करके सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

Related Tags:

ट्रेंडिंग न्यूज़

LAUGH CLUB

संबंधित आलेख