#हादसा
August 9, 2026
चंबा हाद*सा : बस ने कई बार खाए पलटे- सुष्मिता ने नहीं छोड़ा सीट का हैंडल, बताई आपबीती
15 दिन पहले ही रिसर्च करने चुराह आई थी सुष्मिता
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में पेश आए हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया है। चुराह क्षेत्र में हुए दर्दनाक बस हादसे के दौरान 32 वर्षीय सुष्मिता ने जिस हिम्मत के साथ खुद को संभाला- वह हादसे की भयावहता के बीच जिंदगी की जद्दोजहद की कहानी बताती है।
सड़क से नीचे उतरने के बाद बस कई बार पलटती हुई नीचे की ओर चली गई। बस के भीतर यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और कुछ ही क्षणों में पूरा माहौल अफरा-तफरी में बदल गया।
इसी दौरान अयोध्या निवासी सुष्मिता पुत्री प्रमोद कुमार ने अपनी सीट के लोहे के हैंडल को मजबूती से पकड़ लिया। बस के लगातार पलटने के बावजूद उन्होंने पकड़ नहीं छोड़ी। उस समय उनके सामने बस किसी तरह खुद को संभालकर सुरक्षित बच निकलने की ही चुनौती थी।
हादसे के बाद सुष्मिता को घायल अवस्था में मेडिकल कॉलेज चंबा पहुंचाया गया। वहां उपचार के दौरान उन्होंने हादसे का अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, जब बस तेजी से नीचे की ओर जा रही थी, उस वक्त उन्हें एक पल के लिए अपनी जान बचने की उम्मीद भी मुश्किल लगने लगी थी।
कुछ देर बाद बस रुक गई, लेकिन हादसे के सदमे और चोटों के कारण उनकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। शरीर पर चोटें आने के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज चंबा में प्राथमिक उपचार दिया गया। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए आगे के उपचार के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
सुष्मिता पर्यावरण से जुड़े विषय पर शोध कार्य के लिए अयोध्या से चुराह पहुंची थीं। बताया गया है कि वह करीब 15 दिनों से इलाके में रहकर अपने शोध से संबंधित काम कर रही थीं।
शनिवार को वह बैरागढ़ से चंबा जाने के लिए निजी बस में सवार हुई थीं। सफर शुरू होने के कुछ ही समय बाद बस हादसे का शिकार हो गई। सामान्य रूप से शुरू हुआ उनका यह सफर अचानक गंभीर दुर्घटना में बदल गया और उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

हादसे के दौरान बस के लगातार पलटने का मंजर सुष्मिता के लिए बेहद डरावना रहा। सीट के हैंडल को पकड़े रखना उस समय उनके लिए एकमात्र सहारा बना रहा। हादसे को याद करते हुए उनके चेहरे और आवाज में डर साफ नजर आया।
चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत का आकलन किया और बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें टांडा रेफर किया। फिलहाल वह चिकित्सकीय निगरानी में हैं और उनका उपचार जारी है।
अस्पताल में उपचार के दौरान सुष्मिता ने कथित तौर पर अपने परिवार को लेकर एक बात कही। उनके बयान के मुताबिक, उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि यदि उनकी मृत्यु हो जाए तो परिवार को इसकी सूचना न दी जाए और इसकी वजह के तौर पर उन्होंने परिवार से भावनात्मक दूरी होने की बात कही।

हालांकि, इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यह बात उन्होंने किस परिस्थिति और मानसिक स्थिति में कही, इसे लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में परिजनों का पक्ष सामने आने के बाद ही इस पहलू की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सुष्मिता चुराह में पर्यावरण संबंधी शोध के लिए आई थीं। करीब दो सप्ताह से क्षेत्र में रहकर वह अपने काम में जुटी थीं। शनिवार को बैरागढ़ से चंबा की ओर बस यात्रा के दौरान हुए हादसे ने अचानक उनकी पूरी दिनचर्या बदल दी।

बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के दौरान सीट के हैंडल को थामे रखना उनके लिए बेहद अहम साबित हुआ। हादसे में घायल होने के बावजूद वह जीवित बचीं और अब चिकित्सकों की निगरानी में उपचार करा रही हैं। उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

आपको बता दें कि ये हादसा जिला चंबा के चुराह में बैरागढ़- चलूंज मोड़ के पास पेश आया है। यहां पर हादसे के समय बस में चालक और परिचालक समेत करीब 18 लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि बस सड़क से अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हुई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में बस चालक-परिचालक और महिलाएं भी शामिल हैं।