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February 14, 2026

हिमाचल : सोशल मीडिया पर नहीं उड़ेगा देव-परंपरा का मजाक, देवता कमेटी ने खींची लक्ष्मण रेखा

महाशिवरात्रि से एक दिन पहले सात हार कमेटी का बड़ा फैसला

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 siraj valley

मंडी। हिमाचल प्रदेश को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां का जीवन, रहन-सहन, लोगों की आस्था से लेकर परंपरा हर जगह आपको देवता की उपस्थिति मिल ही जाएगी। मगर, बदलते दौर के साथ जब देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराएं सोशल मीडिया के दायरे में आने लगी हैं, तब देव आस्था और मर्यादा को लेकर नए सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

 

देवभूमि में कई जगह देव खेल, गुप्त क्रियाएं और धार्मिक अनुष्ठान मोबाइल कैमरों में कैद होकर सार्वजनिक मंचों पर पहुंच रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में मंडी जिले की सराज घाटी से एक अहम फैसला सामने आया है, जहां देव परंपरा की मर्यादा बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाया गया है।

महाशिवरात्रि से पहले सात हार कमेटी का बड़ा फैसला

सराज घाटी में देव चुंजवाला महादेव की सात हार कमेटी ने अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव से पहले ही स्पष्ट नियम लागू कर दिए हैं। अब कोई भी व्यक्ति देव चुंजवाला महादेव से जुड़े देव खेल या गुप्त कार्यों की फोटो या वीडियो अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा नहीं कर सकेगा।

 

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फर्जी अकाउंट बंद करने के आदेश

कमेटी ने देवता के नाम पर सोशल मीडिया पर चल रहे सभी गैर-अधिकृत अकाउंट को एक सप्ताह के भीतर बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। कमेटी का कहना है कि देवता के नाम का गलत इस्तेमाल आस्था और परंपरा दोनों को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे अकाउंट्स से फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी और गलत कैप्शन को भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

 

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नियम तोड़े तो जुर्माना और कार्रवाई तय

सात हार कमेटी ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर समाज और समिति स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भी वसूला जाएगा। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है।

सिर्फ आधिकारिक अकाउंट से ही आएंगी पोस्ट

अब देव चुंजवाला महादेव से जुड़ी कोई भी जानकारी, फोटो या वीडियो केवल आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ही साझा की जाएगी। यह अकाउंट सात हार कमेटी के संरक्षण और नियंत्रण में रहेगा। कमेटी का कहना है कि इससे देवता की गरिमा, परंपरा की मर्यादा और समाज की एकता बनी रहेगी।

 

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सोशल मीडिया पर देव परंपरा के साथ हो रहा खिलवाड़

देव समितियों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई जगह देव खेल और धार्मिक परंपराओं के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाले जा रहे हैं। इससे न केवल परंपराओं का मजाक बनता है, बल्कि कई स्थानों पर देवता की नाराजगी की बातें भी सामने आती हैं। हालांकि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पहले से ही वीडियो बनाने पर प्रतिबंध लागू है।

क्या बोले सात हार कमेटी के अध्यक्ष

इस पूरे फैसले पर देवराज रावत ने बताया कि देव चुंजवाला महादेव से जुड़ी प्राचीन गतिविधियां, देव खेल और पवित्र स्थलों की रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने कहा कि देव परंपरा को बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था और भविष्य में भी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

 

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अन्य देव कमेटियों के लिए भी संकेत

इस फैसले के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि देवभूमि में देवी-देवताओं की परंपरा और देव नीति को जीवित रखना है, तो अन्य देव कमेटियों को भी ऐसे ही ठोस और समयानुकूल निर्णय लेने होंगे।

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