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February 23, 2026
हिमाचल: 125 KG चांदी से बने गर्भगृह में विराजीं मां काली- सोने का कलश भी जड़ा, भक्तों का उमड़ा सैलाब
मंदिर में हो चुकें हैं 5 करोड़ रुपये खर्च
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ऐतिहासिक शहर नाहन में स्थित कालीस्थान मंदिर इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। वजह है मंदिर के नए बने भव्य गर्भगृह में मां काली की विधि-विधान के साथ की गई स्थापना। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, अंदर की चांदी से सजी दिव्य सजावट और मां काली के तेजस्वी स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कई लोगों की आंखें खुशी से नम नजर आईं।
मंदिर के नए गर्भगृह को बेहद भव्य तरीके से तैयार किया गया है। अब तक इसमें लगभग 125 किलो चांदी का इस्तेमाल हो चुका है और 8 से 10 किलो चांदी का काम अभी बाकी बताया जा रहा है। दीवारों, दरवाजों और अंदर की नक्काशी में बारीक काम किया गया है, जो देखते ही बनता है। गर्भगृह के शिखर पर 7 तोले सोने का कलश लगाया गया है, जिसकी चमक दूर से ही नजर आती है और मंदिर की भव्यता को और बढ़ा देती है।
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मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार इस पूरे निर्माण कार्य पर करीब 4 से 5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। खास बात यह है कि यह पूरा काम स्थानीय श्रद्धालुओं और बाहर से आए दानदाताओं के सहयोग से संभव हुआ है। किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था और सहयोग का यह नतीजा है।
गर्भगृह की चांदी की नक्काशी का काम बनारस से आए 4–5 अनुभवी कारीगरों ने किया। उन्होंने दिन-रात मेहनत कर हर डिजाइन को बड़ी श्रद्धा से उकेरा। हर फूल, हर आकृति और हर उभार में उनकी कला साफ झलकती है। वहीं मंदिर के शिखर पर लगा स्वर्ण कलश जयपुर के पारंपरिक स्वर्णकारों ने तैयार किया। करीब चार महीने की लगातार मेहनत के बाद यह पूरा कार्य संपन्न हुआ।
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नाहन शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। यहां बने अधिकांश मंदिर रियासत काल में तैयार किए गए थे। कालीस्थान मंदिर भी उन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है।
बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1830 में सिरमौर रियासत के राजा विजय प्रकाश ने करवाया था। कहा जाता है कि कुमाऊं वाली रानी स्वयं मां काली की मूर्ति कुमाऊं से लेकर आई थीं। उनकी गहरी श्रद्धा को देखते हुए राजा ने मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। तभी से यह मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया।
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मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पहले जोगीनाथ महंत को सौंपी गई थी। बाद में अलग-अलग महंतों ने यहां सेवा दी। राजा फतेह प्रकाश ने इसी परिसर में 24 भुजा वाली देवी का मंदिर भी बनवाया, जिसे आज बाला सुंदरी माता के रूप में पूजा जाता है।
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समय-समय पर महंतों की परंपरा आगे बढ़ती रही और मंदिर की देखरेख होती रही। सिरमौर रियासत के शासकों की धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण आज भी यहां के मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में देखने को मिलता है।
मंदिर परिसर में एक विशाल वट वृक्ष के नीचे हनुमान जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है। कुछ साल पहले शनिदेव की नई मूर्ति भी यहां स्थापित की गई थी। नवरात्रि, अमावस्या और अन्य विशेष पर्वों पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं।
कालीस्थान मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह नाहन और पूरे सिरमौर की पहचान है। नए गर्भगृह के निर्माण ने इसकी भव्यता में चार चांद लगा दिए हैं। यह निर्माण दिखाता है कि जब समाज एकजुट होकर किसी धार्मिक कार्य के लिए आगे आता है, तो परिणाम कितना भव्य हो सकता है।
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अब यह मंदिर पहले से ज्यादा आकर्षक और दिव्य हो गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां काली की कृपा से यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। आस्था, इतिहास और कला का ऐसा सुंदर संगम कम ही देखने को मिलता है।