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October 14, 2026

पांचवीं शारदीय नवरात्रि : मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि; कैसे करें माता को प्रसन्न

कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप?

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Maa Skandamata 2026 October 15 2026

शिमला। नवरात्रि 2026: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस साल यह दिन 15 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है। मां स्कंदमाता को प्रेम, ममता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मां की कृपा से संतान सुख मिलने की भी मान्यता है। इस दिन पूजा करने के साथ मां की कथा सुनना और मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, शुभ रंग, मंत्र और उनके स्वरूप से जुड़ी खास बातें।

मां स्कंदमाता क्यों कहलाती हैं?

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के इस स्वरूप ने भगवान कार्तिकेय को जन्म दिया था। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। इसी वजह से मां दुर्गा के इस रूप को स्कंदमाता कहा जाता है। मां को ममता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

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कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप?

मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं और मां सिंह पर सवार होती हैं। उनके दोनों हाथों में कमल के फूल दिखाई देते हैं। मां के चेहरे पर सूर्य के समान तेज है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां की पूजा में धनुष-बाण अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

इस विधि से करें मां स्कंदमाता की पूजा

नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल को साफ कर लें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां स्कंदमाता की तस्वीर स्थापित करें। मां को फूल, फल, मिठाई, अक्षत, पान का पत्ता, लौंग और इलायची अर्पित करें।

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इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर मां की पूजा करें। अंत में मां की आरती करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पूजा के दौरान अपनी मनोकामनाएं मां के सामने रखें और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • 15 अक्टूबर 2026 को मां स्कंदमाता की पूजा के लिए दिए गए मुहूर्त इस प्रकार हैं:
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
  • अमृत काल: रात 8:58 बजे से 10:45 बजे तक

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मां स्कंदमाता को कौन-सा भोग लगाएं?

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। आप मां को केले से बनी खीर, हलवा या अन्य मिठाइयां भी अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से भोग लगाने और पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।

नवरात्रि के पांचवें दिन कौन-सा रंग पहनें?

नवरात्रि के पांचवें दिन पीला या सफेद रंग पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन मां स्कंदमाता को पीले फूल चढ़ा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग सुख, शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनकर मां की पूजा करना शुभ माना जाता है।

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मां स्कंदमाता के मंत्र, जिनका करें जाप

मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त पूजा करते समय इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

  • मूल मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
  • बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नमः।
  • प्रार्थना मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
    शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी
  • स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन मंत्रों का श्रद्धा के साथ जाप करने से मन को शांति मिलती है। भक्त मां से सुख-समृद्धि, ज्ञान और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

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