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October 14, 2026
सुक्खू सरकार को झटका : दिवाली पर शुरू नहीं होगी लॉटरी, कंपनियों ने उठाए सवाल
टेंडर की शर्तों पर कंपनियों ने जताई आपत्ति
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार को लॉटरी के जरिए राजस्व जुटाने की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। राज्य में लॉटरी दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया टेंडर से जुड़ी आपत्तियों के कारण आगे खिसक गई है। ऐसे में दीपावली से पहले लॉटरी शुरू होने की संभावना नहीं है। विभाग को अब निविदा दस्तावेजों में संशोधन कर आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
राज्य लॉटरी विभाग ने तीन सितंबर को ई-टेंडर जारी किया था। तय कार्यक्रम के अनुसार 15 सितंबर को तकनीकी निविदाएं खोली जानी थीं। हालांकि, प्रतिस्पर्धा में आगे चल रही पंजाब और पश्चिम बंगाल की एक-एक कंपनी ने टेंडर में शामिल कुछ शर्तों और प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं।
इन आपत्तियों के बाद विभाग ने दस्तावेजों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। अब अगले तीन से चार दिनों के भीतर संशोधित निविदा दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की योजना है। संशोधन के बाद आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी, इसलिए लॉटरी संचालन की शुरुआत दीपावली के बाद ही हो सकेगी।
सरकार की योजना हिमाचल प्रदेश में लॉटरी संचालन के लिए एक ही एजेंट को अधिकृत करने की है। इसके लिए सालाना लाइसेंस फीस 10 करोड़ रुपये प्रस्तावित की गई है। इसमें प्रत्येक वर्ष पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान भी रखा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित व्यवस्था में 30 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी राशि और छह करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़ी शर्तें शामिल हैं।
इन्हीं वित्तीय और अन्य प्रावधानों के तहत कंपनियों को अपनी निविदाएं प्रस्तुत करनी हैं। एक एजेंट के माध्यम से पूरे प्रदेश में संचालन की व्यवस्था बनाने का उद्देश्य लॉटरी प्रक्रिया को एकीकृत करना है। हालांकि, टेंडर की शर्तों पर उठे सवालों के समाधान के बाद ही चयन और संचालन की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।
सरकार की प्रस्तावित योजना में प्रतिदिन अधिकतम 12 डेली ड्रॉ आयोजित करने का प्रावधान है। इसके अलावा साल में तीन विशेष बंपर ड्रॉ निकालने की योजना बनाई गई है। ये बंपर ड्रॉ दीपावली, लोहड़ी और दशहरा के अवसर पर आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं।
योजना के प्रारूप में सिंगल डिजिट डेली लॉटरी को शामिल नहीं किया गया है। यानी सरकार जिस मॉडल के आधार पर लॉटरी शुरू करने की तैयारी कर रही है, उसमें दैनिक ड्रॉ और तीन प्रमुख त्योहारों पर विशेष ड्रॉ की व्यवस्था होगी।
हिमाचल प्रदेश में लॉटरी पर वर्ष 1999 में तत्कालीन धूमल सरकार के कार्यकाल में प्रतिबंध लगाया गया था। उस समय लॉटरी नियमन अधिनियम, 1998 की धारा सात, आठ और नौ के तहत यह कदम उठाया गया था। इसके पीछे मुख्य चिंता यह थी कि अधिक कमाई की उम्मीद में लोग अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा पैसा लगा रहे थे।
इससे कर्ज बढ़ने और वेतन के साथ घरेलू संपत्ति तक गंवाने जैसी समस्याओं की आशंका जताई गई थी। अब राज्य सरकार नए राजस्व स्रोत तलाशने के उद्देश्य से लॉटरी को दोबारा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ी है। इस पहल के जरिए सरकारी आय में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। राज्य में राजस्व के नए साधन विकसित करने के लिए गठित संसाधन सर्जन कमेटी ने लॉटरी दोबारा शुरू करने का सुझाव दिया था। इस कमेटी के अध्यक्ष उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री हैं।
कमेटी की सिफारिश के आधार पर 31 जुलाई, 2025 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लॉटरी दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के प्रस्ताव पर इस संबंध में सहमति बनी थी। योजना तैयार करते समय केरल, पंजाब और सिक्किम में लॉटरी संचालन के मॉडल का भी अध्ययन किया गया।
सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती टेंडर से जुड़ी आपत्तियों को दूर करके प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। संशोधित दस्तावेज जारी होने के बाद निविदा की अगली औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद ही चयनित कंपनी को लॉटरी संचालन के लिए अधिकृत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
कुल मिलाकर, हिमाचल में लॉटरी शुरू करने की योजना को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन निविदा संबंधी अड़चनों के चलते इसकी शुरुआत तय समय पर नहीं हो पा रही है। अब यह देखना होगा कि संशोधित टेंडर के बाद चयन प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और सरकार को प्रस्तावित राजस्व मिलना कब शुरू होता है।