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February 22, 2026

हिमाचल का ऐसा मंदिर जहां सपने से शुरू हुई आस्था की अनोखी कथा- आज भी पूरी होती हैं भक्तों की मन्नतें

अंजनी माता ताल में मिली मूर्ति

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Baba Mahal Nag

चंबा। देवभूमि हिमाचल प्रदेश की पावन धरती पर विराजमान बाबा महल नाग की महिमा आज भी श्रद्धालुओं के हृदय में अटूट आस्था का संचार करती है। यह कथा केवल एक मंदिर या मूर्ति की नहीं, बल्कि विश्वास, चमत्कार और भक्ति की अद्भुत गाथा है, जो पीढ़ियों से लोगों की जुबान पर जीवित है।

 मंदिर में दर्शन करने आते है दूर-दूर से लोग

यह पावन मंदिर जिला चंबा के विधानसभा क्षेत्र चुराह के गुईला गांव में स्थापित है। पहाड़ों की शांत वादियों के बीच स्थित यह धाम आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और बाबा महल नाग के चरणों में माथा टेकते हैं।

 

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घास की बेल बांधकर मांगते है मन्नत

स्थानीय परंपरा के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है, वह मंदिर परिसर में घास की एक छोटी सी बेल बांध देता है। यह बेल उसकी प्रार्थना और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है। जब उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह दोबारा मंदिर आकर उस बंधी हुई बेल को खोल देता है और बाबा का धन्यवाद अदा करता है।

सपने में दिए दर्शन में दिए दर्शन 

यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है, जो वर्षों पहले शुरू हुई थी। लोगों का मानना है कि बाबा महल नाग सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना सुनते हैं और अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर देते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बाबा महल नाग की पवित्र मूर्ति अंजनी माता के ताल से प्रकट हुई थी। कहा जाता है कि सुईला गांव की एक बुजुर्ग महिला, जिन्हें सभी आदरपूर्वक “बूढ़ी मां” कहकर पुकारते थे।

 

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उन्हें एक रात स्वप्न में बाबा महल नाग ने दर्शन दिए। सपने में बाबा ने उन्हें कहा कि वे अंजनी माता के ताल पर जाएं, वहां से उनकी मूर्ति को बाहर निकालें और उसे अपने गांव की ओर लेकर चलें और जिस स्थान पर मूर्ति उन्हें भारी लगने लगे, वहीं उसे स्थापित कर दें, वही स्थान मेरा धाम होगा।

अंजनी माता ताल में मिली मूर्ति 

अगली सुबह बूढ़ी मां गहरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अंजनी माता के ताल पहुंचीं। लोगों का कहना है कि वहां उन्हें सचमुच पानी के बीच बाबा महल नाग की दिव्य मूर्ति दिखाई दी। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ मूर्ति को उठाया और अपने गांव की ओर चल पड़ीं। रास्ता कठिन था, लेकिन भक्ति ने उनके कदमों को मजबूत बनाए रखा।

 

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दर्शन दे वरदान मांगने के लिए कहा

जब वे “शीग” नामक स्थान पर पहुंचीं, तो अचानक मूर्ति इतनी भारी हो गई कि आगे बढ़ पाना संभव नहीं रहा। उसी क्षण बाबा महल नाग ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। बूढ़ी मां ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा। उन्होंने अपने गांव के कल्याण की कामना करते हुए प्रार्थना की कि उनके गांव में कभी दुख, बीमारी या विपत्ति न आए। गांव के बच्चों के घने-घने बाल हों, लंबी-लंबी चोटियां हों, और बिना बीज बोए भी सरसों का साग उग जाए, ताकि कभी अन्न की कमी न हो।

बाबा महल नाग का पावन धाम

कहा जाता है कि बाबा महल नाग ने उनकी यह विनती स्वीकार कर ली और उन्हें आशीर्वाद देकर अंतर्ध्यान हो गए। बूढ़ी मां ने उसी स्थान पर मूर्ति को स्थापित कर दिया और अपने गांव लौट गईं। समय के साथ वही स्थान बाबा महल नाग का पावन धाम बन गया।

 

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यात्रा के दौरान आते हैं हजारों श्रद्धालु

आज भी यह दिव्य मूर्ति चुराह क्षेत्र की गुईला पंचायत में श्रद्धापूर्वक विराजमान है। हर वर्ष बैसाखी के पावन अवसर पर और बाबा की वार्षिक यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। दूर-दूर से भक्त बाबा के दर्शन करने, माथा टेकने और अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई प्रार्थना बाबा महल नाग अवश्य सुनते हैं।

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