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February 18, 2026

मंडी शिवरात्रि में थमी नहीं देव नाराजगी: टेंट छोड़ बाहर बैठे देवी-देवता, नहीं मानी किसी की बात

आदि ब्रह्मा सहित कई देवताओं ने जताई नाराजगी

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International Shivratri Festival

मंडी। छोटी काशी के नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान इस बार देव परंपरा से जुड़ा एक अनोखा और चर्चित दृश्य देखने को मिला। जहां एक ओर पूरा शहर भक्ति और आस्था के रंग में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी ओर देवताओं ने प्रशासन द्वारा बनाई गई पैगोडा शैली की नई टेंट व्यवस्था को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की है।

टेंट के बाहर विराजे देवता

बताया जा रहा है कि महोत्सव में देवी-देवताओं के लिए विशेष रूप से पैगोडा शैली के टेंट लगाए गए थे। लेकिन कई देवताओं ने इन टेंटों में विराजमान होने से इंकार कर दिया और टेंट के बाहर ही अपना दरबार सजा लिया। टेंट छोड़ बाहर कमल पुष्प में विराजे देवताओं ने वहीं से श्रद्धालुओं को दर्शन और आशीर्वाद दिया।

 

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आदि ब्रह्मा सहित कई देवताओं ने जताई नाराजगी

मंडी को कार बांधकर बीमारियों और महामारियों से बचाने वाले देवता आदि ब्रह्मा ने पैगोडा टेंट के बाहर बैठकर विरोध दर्ज कराया। मंगलवार को पड्डल सीढ़ियों पर विराजने पहुंचे कुछ अन्य देवता भी व्यवस्थाओं से असंतुष्ट दिखे और नाराज होकर पड्डल मैदान में बाहर ही विराजमान हो गए।

यह देवता रहे नाराज 

देव बनयूरी, देव सत्य नारायण, आदि ब्रह्मा, शैल पुत्री और ग्वाली कामेश्वर सहित कई देवी-देवता टेंट के भीतर न बैठकर बाहर ही श्रद्धालुओं को दर्शन देते रहे। इस घटनाक्रम ने पूरे महोत्सव में चर्चा का माहौल बना दिया।

 

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कारदारों ने उठाए सवाल

देवताओं के साथ आए कारदारों ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि प्रशासन ने पुराने टेंट लगाकर उन्हें पैगोडा शैली का नाम दे दिया है, जबकि न तो वहां पर्याप्त साफ-सफाई है और न ही बैठने की उचित व्यवस्था।

 

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देव संस्कृति से जुड़े निखिल आहुलवालिया का कहना है कि आयोजन से पहले देवता समिति को सभी देवताओं और उनके कारदारों से समन्वय करना चाहिए था, ताकि ऐसी स्थिति उत्पन्न न होती। उनका कहना है कि देव परंपरा की गरिमा और सम्मान बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

प्रशासन और समिति का पक्ष

वहीं सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने कहा कि देवताओं के कारदारों से पहले ही बातचीत कर ली गई थी और व्यवस्थाओं की जानकारी दे दी गई थी। प्रशासन की ओर से महोत्सव के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। हालांकि देवताओं द्वारा टेंट के बाहर बैठने की घटना ने प्रशासन और आयोजन समिति की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है।

 

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आस्था के बीच विरोध का संदेश

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में देवताओं का इस तरह टेंट छोड़ बाहर बैठना केवल नाराजगी ही नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार का संकेत भी माना जा रहा है।

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