#धर्म

February 23, 2026

हिमाचल का जाहरवीर गुगा मंदिर: जहां भूत-प्रेतों से मिलता है छुटकारा, दूर होते हैं मानसिक रोग

यहां विराजमान है जाहरवीर गुगा जी महाराज

शेयर करें:

aharveer Guga Temple Kangra

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की पावन वादियों में आस्था और रहस्य से जुड़ा एक ऐसा स्थल है, जहां श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि राहत और विश्वास की तलाश में भी पहुंचते हैं। जाहरवीर गुगा मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां सच्चे मन से माथा टेकने पर भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। दूर-दूर से लोग अपनी परेशानियां लेकर आते हैं और गुगा जाहरवीर की कृपा से सुकून और नई उम्मीद लेकर लौटते हैं। सदियों पुरानी आस्था, लोकविश्वास और अनोखी परंपराएं इस मंदिर को हिमाचल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में खास स्थान दिलाती हैं।

यहां विराजमान है जाहरवीर गुगा जी महाराज

बता दें कि यह मंदिर कागंड़ा जिला के पालमपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर, पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे पर ग्राम पंचायत सलोह में यह मंदिर स्थित है। जहां पर विराजमान हैं जाहरवीर गुगा जी महाराज। सड़क से गुजरने वाले लोगों की नजर भी इस मंदिर पर जरूर पड़ती है। यहां रोजाना श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: जड़ी-बूटियों की तलाश में जंगल गया था शख्स, 150 मीटर गहरी खाई में पड़ा मिला

जाहरवीर गुगा मंदिर की अनोखी मान्यता

लोग सर्पदंश (सांप के काटने), मानसिक बीमारियों, भूत-प्रेत बाधा और अन्य तरह की परेशानियों से छुटकारा पाने की आस लेकर यहां पहुंचते हैं। कई लोग तो ऐसे भी हैं जो सालों से यहां आकर माथा टेकते हैं और अपनी मन्नतें पूरी होने की बात कहते हैं।

डेढ़ सदी से कायम है श्रद्धा का सिलसिला

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सिलसिला कोई नया नहीं है। करीब 160 सालों से यहां लोगों का आना लगा हुआ है। मान्यता है कि जाहरवीर गुगा जी महाराज यहां के पुजारी पफू राम के साथ इस स्थान पर आए और यहीं विराजमान हो गए।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: कार चालक की लापरवाही से गिरा बाइक सवार, सामने से आ रही बस ने कुचला- हुई मौ.त

 

तभी से यह जगह आस्था का बड़ा केंद्र बन गई। धीरे-धीरे आसपास के इलाकों में इसकी ख्याति फैल गई और अब हिमाचल के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

सांपों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं गुग्गा जाहरवीर

लोक कथाओं में गुग्गा जी को सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें गोगाजी, गुग्गा, जाहरवीर, जाहर पीर जैसे कई नामों से जाना जाता है। कहा जाता है कि वे गुरु गोरखनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। राजस्थान के छह सिद्धों में गुग्गा जी को समय की दृष्टि से सबसे पहले माना जाता है। उनकी वीरता और भक्ति की कहानियां आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल : रेहड़ी की आड़ में चला रहा था चिट्टे का धंधा, पुलिस ने बस अड्डे से दबोचा तस्कर

रक्षाबंधन से जन्माष्टमी तक उमड़ती है भक्तों की भीड़

रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी तक मंदिर में खास रौनक देखने को मिलती है। इन दिनों श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और उनकी छतरी पर डोरियां, चूड़ियां, श्रृंगार का सामान, कपड़े की कतरनें और अन्य वस्तुएं बांधकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई हर दुआ यहां जरूर पूरी होती है।

राजस्थान से जुड़ी है मंदिर की प्राचीन कथा

जानकार बताते हैं कि यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है। माना जाता है कि बाबा राजस्थान से यहां आए थे। उस समय जिन लोगों को ‘खेल’ या आध्यात्मिक बाधाएं होती थीं, उन्हें यहां लाकर ठीक किया जाता था। धीरे-धीरे यह बात दूर-दूर तक फैल गई और यह स्थान लोगों के लिए आस्था और उम्मीद का केंद्र बन गया।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: नालागढ़ ब्ला.स्ट केस में दो और आरोपी धरे, पि.स्तौल-कारतूस भी मिले; आ.तंकी संगठन से जुड़े तार

चौहान वंश में जन्मे थे वीर गोगाजी महाराज

इतिहास के अनुसार, गोगाजी का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) में चौहान वंश में हुआ था। वे चौहान शासक जैबर (जेवरसिंह) और माता बाछल के पुत्र थे। कहा जाता है कि उनका जन्म गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से भादो सुदी नवमी के दिन हुआ था। राजा पृथ्वीराज चौहान के बाद उन्हें चौहान वंश का एक वीर, गुरुभक्त और प्रतापी राजा माना जाता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख