#धर्म
April 2, 2025
हमारे हिमाचल की वो देवी मां- जिनके दरबार में लगता है सिड्डू और घी का मेला
इस मेले में महिलाओं की एंट्री ही बैन है
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शिमला। नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। यह नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष समय होता है। हर दिन मां के एक अलग रूप की आराधना की जाती है, जिससे भक्तों को शक्ति, ज्ञान, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि के नौ दिनों में पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। देवी स्कंदमाता को कार्तिकेय (स्कंद) की माता माना जाता है, जो शक्ति और मातृत्व का प्रतीक हैं। इस दिन भक्त विशेष रूप से मां स्कंदमाता की आराधना करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
आज के अपने इस लेख में हम बात करेंगे हमारे हिमाचल की एक ऐसी देवी मां की- जिनके दरबार में सिड्डू और घी का मेला लगता है। मगर इस मेले में महिलाओं की एंट्री बैन है- यानी महिलाएं इस मेले में नहीं जा सकती हैं।
इस चैत्र नवरात्रि के पंचम वंदन के साथ हम आपको शिमला-ठियोग के मतियाना में विराजती देवी मां माहेश्वरी शड़ी जी के बारे में बताएंगे- जिनके दरबार में लगता है बिशु का सबसे बड़ा मेला।
कथा बताती है कि, जिस शड़ी नामक स्थान से माता की उत्पत्ति हुई थी, आज उसी स्थान पर उनका मंदिर मौजूद है - जहां देव मोती नाना भी विराजित हैं। मगर इन नवरात्रों में माता माहेश्वरी जी अपने दूसरे और छोटे मंदिर में विराजित हुई हैं- जहां वो अपने भक्तों को पूरे 9 दिनों तक दर्शन देंगी और फिर नौवें दिन की पूजा के बाद वापस अपने स्थायी मंदिर में लौट जाएंगी।
बता दें कि हर साल जेठ के महीने में माता माहेश्वरी शड़ी जी के दरबार में लगने वाला जठेंजो मेला - यानी सिड्डू घी का मेला काफी पॉपुलर और अनोखा मेला है।
बताते हैं कि मतियाना की सबसे ऊंची चोटी यानी नाग टिब्बा पर माता माहेश्वरी जी ने दैत्य का वध किया था, जिसको देवी मां के भक्त आज भी सेलिब्रेट करते हैं और इस खास मेले के दिन माता की पालकी लेकर पैदल ही उस स्थान तक पहुंचते हैं। जहां वो अपने साथ में लाए सिड्डू घी का भोग माता को लगाते हैं और फिर भक्तों में भी उसी घी और सिड्डू का प्रसाद बांटा जाता है।
वहीं, इन माता रानी का बिशु भी अप्पर हिमाचल एरिया में काफी फेमस है- जिसमें 4 बड़ी देवठियो- चिखडेश्वर देवता ठियोग, कनलेश्वर देवता घनौड़ी, नाग देवता जदूण चदारा और डोम देवता गुठाण के देवलू शामिल होते हैं और प्राचीन रस्मों को निभाने के साथ ही फेमस चोलटू डांस किया जाता है।