#राजनीति
January 29, 2026
मंत्री विक्रमादित्य सिंह का गांववालों को ऑफर- आप हमें जमीन दो, हम आपको सड़क देंगे
विक्रमादित्य की अपील, PMGSY-IV में 2300 किमी सड़कें बनाने की तैयारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के गांवों तक सड़क पहुंचाने की कोशिश में लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रदेशवासियों के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें साफ शब्दों में कहा है कि जनता सरकार को सड़क बनाने के लिए जमीन देने को तैयार हो जाएं तो जल्द ही सड़क बना कर दे देंगे।
इस अपील के साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत प्रदेश में हजारों किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण की तैयारी को औपचारिक रूप से रफ्तार मिल गई है। लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत हिमाचल प्रदेश में लगभग 2300 किलोमीटर अतिरिक्त ग्रामीण सड़कों को मंजूरी मिलने की संभावना है। इन सड़कों का उद्देश्य दूरदराज, पहाड़ी और अभी तक सड़क सुविधा से वंचित गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ना है। विभाग का मानना है कि इससे न सिर्फ आवागमन आसान होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधा बल मिलेगा।
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मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए एक अहम शर्त रखी गई है। जिन गांवों में सड़क प्रस्तावित होगी, वहां के लोगों को सड़क के लिए आवश्यक भूमि लोक निर्माण विभाग के नाम गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित करनी होगी। बिना भूमि हस्तांतरण के किसी भी सड़क परियोजना को मंजूरी नहीं दी जाएगी। विभाग का कहना है कि पूर्व में कई परियोजनाएं केवल जमीन विवादों और अधिग्रहण की दिक्कतों के कारण अटक जाती थीं, जिससे न तो केंद्र से स्वीकृति मिल पाती थी और न ही काम समय पर शुरू हो पाता था।
विक्रमादित्य सिंह ने अपनी अपील में यह भी कहा कि सड़क केवल एक रास्ता नहीं होती, बल्कि वह गांव के भविष्य का रास्ता होती है। सड़क बनने से बच्चों की स्कूल तक पहुंच आसान होती है, मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता है, किसानों और बागवानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सहूलियत मिलती है और आपातकालीन सेवाओं का रास्ता भी खुलता है। उन्होंने कहा कि सड़कें बनने से गांवों में रोजगार, पर्यटन और छोटे व्यवसायों के नए अवसर पैदा होते हैं।
लोक निर्माण विभाग ने पंचायतों, प्रधानों, BDC सदस्यों और अन्य जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को इस योजना के लाभ समझाएं। विभाग चाहता है कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आपसी सहमति और पारदर्शिता के साथ पूरी हो, ताकि अधिक से अधिक सड़क प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा सकें। विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संभावित सड़कों का सर्वे तेजी से पूरा करें और उन गांवों की सूची तैयार करें, जहां लोग जमीन देने को तैयार हैं।

अब यह पूरा मामला काफी हद तक ग्रामीणों के फैसले पर टिक गया है। कितने गांव सड़क सुविधा के लिए अपनी भूमि देने को आगे आते हैं, इस पर निर्भर करेगा कि हिमाचल को PMGSY-IV के तहत कितनी परियोजनाएं मिलती हैं। मंत्री की पोस्ट के बाद प्रदेश में इस मुद्दे पर चर्चा भी शुरू हो गई है कुछ लोग इसे विकास के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ गांवों में जमीन देने को लेकर आशंकाएं और सवाल भी उठने लगे हैं।