#राजनीति
February 18, 2026
स्वास्थ्य मंत्री की बेटी पर सुक्खू सरकार मेहरबान- 6 महीने का दिया सेवा विस्तार, बेरोजगार हक्के-बक्के
रिटायर अफसरों पर मेहरबान हो रही सुक्खू सरकार
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारों की कमी नहीं है और दूसरी ओर सरकार की ओर से लगातार ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जो बेरोजगारों के दर्द पर नमक छिड़कने से कम नहीं है। एक तरफ बेरोजगार युवा नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, तो दूसरी ओर सत्ता के आसपास रहने वालों के लिए सरकारी दरवाजे बार-बार खुल रहे हैं। कहीं, रिटायर हो चुके अफसरों को दोबारा जिम्मेदारी दी जा रही है, तो कहीं सरकार के चहेतों को सेवा विस्तार मिल रहा है। ताजा मामला सीधे मंत्रिमंडल से जुड़ा है, जिसने एक बार फिर सरकार की मंशा और नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री की बेटी को मिला सेवा विस्तार
ताजा मामला स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल के परिवार से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक उनकी बेटी गातांजलि कश्यप, जो सोलन में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में साइकोलॉजी की लेक्चरर के पद पर कार्यरत थीं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद छह महीने का सेवा विस्तार दिया गया है। यह फैसला सुक्खू सरकार के कार्यकाल में लिया गया है, जिस पर विपक्ष और सामाजिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में राज्यसभा चुनाव का बिगुल- 16 मार्च को होगी वोटिंग, कांग्रेस खेमे में बढ़ी धुकधुकी
राजनीतिक रिश्ते भी चर्चा में
गातांजलि कश्यप के पति राजेश कश्यप भाजपा नेता हैं और वे सोलन विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। दिलचस्प बात यह रही कि उस चुनाव में उन्हें उनके ही ससुर धनी राम शांडिल ने हराया था। अब सेवा विस्तार का यह मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में रिश्तों और फैसलों के टकराव पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

यह भी पढ़ें :नादौन छोड़ देहरा से चुनाव लड़ना चाहते हैं CM सुक्खू, पत्नी सीट छोड़ने को तैयार नहीं: जयराम ठाकुर
प्रदेश में अभी भी 6 लाख बेरोजगार
बता दें कि प्रदेश में बेरोजगारी की आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 6 लाख के पास पहुंच चुकी है। चुनावों के दौरान रोजगार को लेकर बड़-बड़े वादे किए जाते है, मगर हकीकत में युवाओं को कोई ठोस राहत मिलती नजर नहीं आती।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में रिश्ते का खौफनाक अंत: पति ने किया पत्नी का म.र्डर- फिर खुद भी तोड़ा दम
इन अफसरों पर भी मेहरबान रही है सरकार
सुक्खू सरकार के कार्यकाल में कई रिटायर्ड और पूर्व अफसरों को दोबारा अहम पदों पर नियुक्त किया गया है। पूर्व मुख्य सचिव राम सुभग सिंह को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया। जिन पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना पर कभी मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उन्हें बिजली बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। इसके अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी गोपाल शर्मा को ओएसडी नियुक्त किया गया। अनिल कपिल, हरीश गज्जू, डॉ. बसु सूद समेत कई अन्य अधिकारियों को भी सेवा विस्तार या नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
यह भी पढ़ें : CM सुक्खू और उनके परिवार को युवक ने दी गालियां- इंस्टाग्राम पर हुआ वायरल, पुलिस ने हरियाणा से दबोचा
आर्थिक तंगी के बीच लाखों की सैलरी
सरकार एक ओर आर्थिक संकट का हवाला देती रही है और खर्चों पर नियंत्रण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सेवा विस्तार पाने वाले अफसरों को मोटी सैलरी भी दी जा रही है। यही विरोधाभास सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करता है और यह धारणा मजबूत करता है कि व्यवस्था परिवर्तन का लाभ सीमित वर्ग तक ही सिमट कर रह गया है।