#राजनीति
November 14, 2025
बिहार में नहीं चला सुक्खू का जादू, करारी हार से गरमाई हिमाचल की सियासत, अध्यक्ष पद पर चर्चा तेज
बिहार चुनाव में नहीं चला सीएम सुक्खू का जादू
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शिमला। बिहार चुनाव में कांग्रेस को मिली जबरदस्त हार के बाद अब हिमाचल में भी हलचल तेज हो गई है। बिहार में सीएम सुक्खू प्रचार करने तो गए थे, मगर उनका हिमाचल मॉडल वहां काम ना आ सका और कांग्रेस बिहार में 5 से कम सीटों तक ही सीमित होती दिख रही है।
वहीं, बिहार के हाल देखने के बाद प्रदेश कांग्रेस समझ चुकी है कि कमजोर संगठन के भरोसे चुनाव नहीं जीते जाते. इसलिए पार्टी ने जिलों से बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है और पूरा संगठन दोबारा एक्टिव करने में जुट गई है. विधानसभा चुनाव करीब हैं, ऐसे में कांग्रेस अब कोई ढिलाई नहीं चाहती. पार्टी ने जिलों में अपने पर्यवेक्षक भेजे दिए हैं, जो नेताओं से लगातार राय ले रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल आखिर प्रदेश कांग्रेस की कमान किसे मिलेगी?
काफी समय से कांग्रेस जिलों में कमजोर दिखाई दे रही थी. कई जगह पद खाली थे और कार्यकर्ताओं में भी ऊर्जा की कमी देखी जा रही थी. इसे देखते हुए हाईकमान ने सबसे पहले जिला स्तर पर संगठन को दुरुस्त करने का फैसला लिया है.प्रत्येक जिले में पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं, जिनका काम है स्थानीय नेताओं से राय लेना, सक्रिय और स्वीकार्य नेताओं की पहचान करना. संगठन को एकजुट और पारदर्शी बनाना. ये पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली भेजेंगे.
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प्रदेश अध्यक्ष का पद काफी समय से खाली है. हाईकमान ने छह नेताओं के इंटरव्यू तक किए, कई बैठकें भी हुईं, लेकिन पार्टी ने अपना निर्णय अभी भी नहीं लिया. पार्टी के कुछ लोगों कहना है कि हाईकमान पहले जिला इकाइयों को मजबूत करेगें, ताकि नए प्रदेश अध्यक्ष को एक मजबूत टीम मिले और काम को सही तरीके से शुरू कर सके. बता दें कि इस समय ठियोग से विधायक और पूर्व में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहे कुलदीप राठौर का मान आगे चल रहा है। वहीं, चर्चा ये भी है कि शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को भी कमान सौंपी जा सकती है।
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2027 के विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन कांग्रेस ने तैयारी अभी से तेज कर दी है. कांग्रेस नहीं चाहती कि कमजोर संगठन का असर चुनावी तैयारी पर पड़े. इसलिए जिला स्तर पर बदलाव शुरू किए गए हैं ताकि पार्टी दोबारा एक्टिव हो सके और कार्यकर्ता भी उत्साहित हों. पार्टी का लक्ष्य साफ है चुनाव नजदीक आने से पहले मजबूत टीम और मजबूत जमीन तैयार करना.
हिमाचल कांग्रेस में चल रही इस तेज हलचल से साफ है कि आने वाले दिनों में बड़े फैसले सामने आ सकते हैं, जो प्रदेश की राजनीति में नई दिशा तय करेंगे. कांग्रेस पार्टी में चर्चा है कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट दिल्ली पहुंचते ही जिला अध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है. इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का नाम भी जल्द तय किया जा सकता है.