#राजनीति
February 2, 2026
हिमाचल को पहले से ज्यादा बजट देगी मोदी सरकार: अनुराग ठाकुर ने खोली झूठ की पोल!
केंद्र कर रहा भरपूर मदद, अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर ना फोड़े सुक्खू सरकार
शेयर करें:

शिमला। केंद्रीय बजट के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) की सिफारिश न किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। मुख्यमंत्री का दावा था कि केंद्र सरकार ने राज्य को सिर्फ “झुनझुना” थमा दिया है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए प्रदेश के साथ अन्याय करार दिया।
सीएम सुक्खू के इन आरोपों के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर सामने आए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि हिमाचल को न तो कम पैसा मिला है और न ही केंद्र ने किसी तरह का भेदभाव किया है। अनुराग ठाकुर के मुताबिक कांग्रेस सरकार जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में 8 फरवरी को होगा कुछ बड़ा? सीएम सुक्खू की कैबिनेट बैठक पर टिकी नजरें!
अनुराग ठाकुर ने आंकड़ों के साथ बताया कि 15वें वित्त आयोग में केंद्र के कुल करों में हिमाचल की हिस्सेदारी 0.83 प्रतिशत थी, जबकि 16वें वित्त आयोग में यह बढ़कर 0.914 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि यह साफ दिखाता है कि मोदी सरकार ने हिमाचल का हिस्सा घटाया नहीं, बल्कि बढ़ाया है।
भाजपा सांसद के अनुसार वर्ष 2024-25 में हिमाचल को 10,575.20 करोड़ रुपये मिले, 2025-26 में 11,561.66 करोड़ रुपये और 2026 में 13,949.97 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान है। इस तरह करीब 2,388 करोड़ रुपये अतिरिक्त हिमाचल को मिलेंगे। अनुराग ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब राशि लगातार बढ़ रही है तो “झुनझुना” कहने का आधार क्या है?
यह भी पढ़ें : हिमाचल: समय पर पंचायत चुनाव करवाने पर संशय, आयोग के निर्देश नहीं मान रही अफसरशाही !
अनुराग ठाकुर ने कहा कि अगर केंद्र सरकार भेदभाव करती तो कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और पंजाब जैसे कांग्रेस या विपक्ष शासित राज्यों को फायदा नहीं मिलता। उन्होंने स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी की सरकार राज्यों के साथ समान व्यवहार करती है।
भाजपा सांसद ने RDG को लेकर कहा कि यह कभी भी स्थायी व्यवस्था नहीं थी। 15वें वित्त आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि यह अनुदान केवल पांच साल के लिए ट्रांजिशनल सपोर्ट है। ऐसे में इसके खत्म होने पर केंद्र सरकार को दोष देना गलत है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में होने जा रही है बंपर भर्ती, 300 के करीब युवाओं को मिलेगी नौकरी; जानें डिटेल
अनुराग ठाकुर ने हिमाचल की तुलना उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश से करते हुए कहा कि हिमाचल का अपना कर संग्रह जीएसडीपी का केवल 5.6 प्रतिशत है, जबकि खर्च 21 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। राज्य पर कर्ज जीएसडीपी का करीब 42.8 प्रतिशत हो गया है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार अपने बजट का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा सैलरी, पेंशन और ब्याज में खर्च कर रही है, जबकि कैपिटल एक्सपेंडिचर सबसे कम है। विकास पर कम और खर्चीले ढांचे पर ज्यादा पैसा जा रहा है।
अनुराग ठाकुर ने अंत में कहा कि सच्चाई यह है कि हिमाचल को पहले से ज्यादा पैसा मिल रहा है। राज्य सरकार को अपनी वित्तीय कमियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, न कि केंद्र पर आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करना चाहिए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: बर्फबारी में मशालें जलाकर भगाई बुरी शक्तियां, जानें ऐतिहासिक पर्व की मान्यता
अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार जानबूझकर अधूरी जानकारी देकर लोगों को भ्रमित कर रही है। उन्होंने कहा कि असली चुनौती यह नहीं है कि केंद्र से कितना पैसा मिल रहा है, बल्कि यह है कि प्रदेश सरकार वित्तीय अनुशासन, कर सुधार और भविष्य के निवेश को लेकर कितनी गंभीर है।
अनुराग ठाकुर ने हिमाचल की जनता से अपील की कि वे कांग्रेस सरकार के खोखले दावों और राजनीतिक शोर में न आएं। आयोग के आंकड़े खुद गवाही देते हैं कि हिमाचल को 16वें वित्त आयोग में पहले से अधिक संसाधन मिले हैं। उन्होंने कहा कि “हिमाचल की स्थायी समृद्धि का रास्ता आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन से होकर जाता है।