#राजनीति
January 18, 2026
राज्यपाल ने सुक्खू सरकार के फैसले पर उठाए सवाल, बोले- चिट्टा आरोपियों पर चुनावी रोक गलत
राज्यपाल बोले- चुनाव लड़ने का अधिकार छीनना कानूनन गलत
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राजभवन और सुक्खू सरकार के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पंचायत चुनावों से पहले चिट्टा तस्करी में संलिप्त लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का बड़ा बयान सामने आया है। राज्यपाल ने इस फैसले को कानूनन गलत बताते हुए साफ कहा है कि सरकार किसी भी नागरिक को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं कर सकती।
दरअसल, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा की थी कि प्रदेश में चिट्टा तस्करी में लिप्त लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे और इस संबंध में प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा। सरकार के इस ऐलान के बाद अब राजभवन की आपत्ति ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
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शनिवार को शिमला में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि चुनाव लड़ने के अधिकार से किसी को वंचित करना एक कानूनी विषय है। यदि सरकार ऐसा कोई फैसला लेती है, तो वह निश्चित रूप से अदालत की कसौटी पर जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बंधक नहीं बनाया जा सकता, सभी नागरिक स्वतंत्र हैं और उनके अधिकारों की एक संवैधानिक सीमा है।
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राज्यपाल ने याद दिलाया कि इससे पहले भी जब राजभवन में नशे के खिलाफ अभियान के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को बुलाया गया था, तब कुछ प्रतिनिधियों ने नशे में संलिप्त लोगों को पंचायत सुविधाओं से वंचित करने की बात कही थी। उस समय भी उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि पंचायत प्रतिनिधि ऐसा नहीं कर सकते। अब यदि सरकार खुद इस दिशा में कदम बढ़ाती है, तो यह व्यापक रूप से स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नशे जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल नियम.कानून या पाबंदियां ही पर्याप्त नहीं हैं। न तो होर्डिंग लगाने से और न ही नारों से नशे पर लगाम लगाई जा सकती है। इसके लिए जनता के बीच जाकर व्यापक जन.जागरूकता अभियान चलाना होगा। जब तक समाज खुद इस बुराई के खिलाफ खड़ा नहीं होगा, तब तक शासन और प्रशासन के प्रयास अधूरे रहेंगे।
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इस बीचए राज्यपाल ने शिपकी.ला के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा और चीन अधिकृत तिब्बत से व्यापार शुरू होने के मुद्दे पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि इस विषय को राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष उठाया है और अब विदेश मंत्रालय इस पर विकल्पों पर काम कर रहा है। यदि यह मार्ग खुलता है, तो इससे न केवल किन्नौर बल्कि पूरे प्रदेश के व्यापारियों को लाभ मिलेगा और ऐतिहासिक व्यापार मार्ग फिर से जीवंत हो सकेगा।