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June 29, 2026
हिमाचल: महिला हेल्थ वर्कर के जज्बे को सलाम.. उफनता नाला पार कर बच्चों को पिलाई पोलिया खुराक
नाले का बढ़ा जलस्तर, फिर भी नहीं टूटा हौसला
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लाहौल। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में इन दिनों मौसम लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारी बारिश के चलते कई नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे कई क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य कार्य से जुड़ी महिलाओं ने साहस और समर्पण का परिचय देते हुए जोखिम भरे उफनते नालों को बुलडोजर की मदद से पार किया और अपने कार्य को आगे बढ़ाया।
लाहौल घाटी के टिंगराट पोलियो बूथ पर तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्ता पलजोम बुट्टी ने ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। उन्होंने खराब मौसम और तेज बहाव वाले मयाड़ नाले की परवाह किए बिना बच्चों तक पोलियो की दवा पहुंचाने का फैसला लिया।
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जब नाले का पानी बढ़ गया और सामान्य रास्ते से जाना मुश्किल हो गया, तब उन्होंने बुलडोजर की मदद ली। बुलडोजर के जरिए नाला पार कर वह ग्रामीण इलाकों तक पहुंचीं और बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाईं।
रविवार को मयाड़ नाले में पानी का बहाव काफी तेज हो गया था। हालात ऐसे थे कि लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। कई जगह रास्ते बंद हो गए थे और सुरक्षित तरीके से नाला पार करना चुनौती बन गया था।
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लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने तय किया कि किसी भी हालत में पोलियो अभियान को प्रभावित नहीं होने देना है। इसी जज्बे के साथ वह बुलडोजर की सहायता से नाला पार कर निर्धारित क्षेत्र में पहुंचीं।
कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने अपने क्षेत्र के बच्चों तक पहुंचकर उन्हें समय पर पोलियो की दवा पिलाई। उनके इस प्रयास से अभियान सफल रहा और बच्चों को बीमारी से बचाव की सुरक्षा मिली।
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स्थानीय लोगों ने भी स्वास्थ्य विभाग की टीम और खासतौर पर पलजोम बुट्टी के साहस की सराहना की। लोगों का कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी जिस मेहनत और जिम्मेदारी से अपना काम करते हैं, वह सभी के लिए प्रेरणा है।
लाहौल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने स्वास्थ्य कार्यकर्ता के समर्पण की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारी समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भी अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत की वजह से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच पाती हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। यह वायरस मुख्य रूप से दूषित पानी और खाने के माध्यम से फैल सकता है। यह बीमारी बच्चों के शरीर के नर्व सिस्टम पर हमला करती है। अगर बीमारी गंभीर रूप ले ले तो इससे बच्चे के हाथ-पैरों में कमजोरी आ सकती है और कई मामलों में हमेशा के लिए लकवा भी हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि पोलियो का कोई सीधा इलाज नहीं है। इससे बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका केवल टीकाकरण है।
डॉक्टरों के अनुसार जन्म से लेकर 5 साल तक के सभी बच्चों को पोलियो की दवा जरूर पिलानी चाहिए। अगर बच्चे को पहले भी पोलियो की बूंदें दी जा चुकी हैं, तब भी हर अभियान में दवा पिलाना जरूरी होता है। हर बार पोलियो ड्रॉप देने से बच्चे की रोगों से लड़ने की क्षमता और मजबूत होती है।
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पोलियो होने पर कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे-
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को यह नहीं सोचना चाहिए कि बच्चे को पहले पोलियो ड्रॉप मिल चुकी है, इसलिए दोबारा जरूरत नहीं है। हर अभियान में बच्चे को पोलियो की खुराक दिलाना जरूरी है। अगर बच्चे को हल्की सर्दी, खांसी या दस्त भी है, तब भी पोलियो की दवा सुरक्षित मानी जाती है। इसलिए सभी माता-पिता अपने बच्चों को समय पर पोलियो की बूंदें जरूर पिलाएं।