#राजनीति

February 13, 2026

सर्वदलीय बैठक बनी सियासी रणभूमि: सीएम सुक्खू बोले- भाजपा के लिए 'प्रदेश हित' से ऊपर "कुर्सी हित"

सीएम बोले-जयराम सरकार जितनी ग्रांट मुझे मिलती, तो चुका देता प्रदेश का आधा कर्ज

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CM Sukhu attack on himachal BJP

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीति टकराव का मंच बन गई। प्रदेश की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज और रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने जैसे अहम मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में चर्चा से ज्यादा सियासी घमासान देखने को मिला। बैठक शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक बीच में ही उठकर बाहर चले गए। भाजपा के इस कदम से बैठक का माहौल गरमा गया और सरकार तथा विपक्ष आमने.सामने आ गए।

भाजपा के आग्रह पर बुलाई बैठक, फिर बहिष्कार

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बैठक के बाद कहा कि सर्वदलीय बैठक भाजपा के आग्रह पर ही बुलाई गई थी। उन्होंने बताया कि भाजपा की मांग पर बैठक का स्थान सचिवालय से बदलकर पीटरहॉफ किया गया, लेकिन इसके बावजूद भाजपा प्रतिनिधि अपनी बात रखे बिना ही बाहर चले गए। सुक्खू ने इसे गैर.जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए कहा कि ऐसे गंभीर वित्तीय विषय पर राजनीति करना प्रदेशहित में नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा स्पष्ट करे वह आरडीजी बहाली के पक्ष में है या विरोध में।

 

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बीजेपी के लिए प्रदेश से बड़ी कुर्सी

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा नेताओं के लिए प्रदेश हित से ऊपर कुर्सी हित है। प्रदेश की जनता यह सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब वह खुद ही दे देगी। सीएम सुक्खू ने कहा कि ऐसे में समय में प्रदेश हित से ऊपर किसी का कुर्सी हित नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले से ही बहिष्कार की योजना बनाकर आया था और बैठक को राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की गई। 

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मुझे मिलती इतनी ग्रांट तो खत्म कर देता आधा कर्ज

सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार आर्थिक कुप्रबंधन की विरासत छोड़ गई है। उनका दावा था कि यदि वर्तमान सरकार को भी पूर्व सरकार की तरह हजारों करोड़ रुपये की सहायता मिलती, तो आधे कर्ज का भुगतान किया जा सकता था।

 

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RDG पर केंद्र तक लड़ाई का ऐलान

मुख्यमंत्री ने कहा कि RDG बंद होना सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता का मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा में इतनी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है कि वह इस मुद्दे को मजबूती से केंद्र सरकार के समक्ष रख सके। बैठक में सीपीआईएम, आम आदमी पार्टी और बीएसपी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और आर्थिक संकट से निपटने के लिए सुझाव दिए। सरकार ने इसे सकारात्मक पहल बताया, जबकि भाजपा ने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप दोहराया।

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सियासत गरमाने के आसार

पीटरहॉफ में हुई इस तल्ख़ बैठक के बाद हिमाचल की राजनीति में नई खींचतान शुरू हो गई है। एक ओर सरकार सर्वदलीय सहमति से आर्थिक संकट का समाधान खोजने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है। RDG का मुद्दा अब प्रदेश की सियासत का बड़ा केंद्र बनता दिख रहा है और आने वाले दिनों में यह टकराव विधानसभा से लेकर दिल्ली तक गूंज सकता है।

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