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September 29, 2026

सुंदर ठाकुर को साथ लेकर दिल्ली पहुंचे CM सुक्खू, क्या दो गुटों की खींचतान कैबिनेट विस्तार में बन रही बाधा

एक गुट सुंदर सिंह ठाकुर तो दूसरा आशीष बुटेल को बनाना चाहता है मंत्री

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cm sukhu in delhi

शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में कैबिनेट विस्तार को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को साथ लेकर दिल्ली पहुंचना ऐसे समय में हुआ है, जब मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री और संभावित फेरबदल को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाओं का दौर जारी है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे ने इन अटकलों को और हवा दे दी है कि अब कैबिनेट विस्तार का मामला निर्णायक दौर में पहुंच सकता है।

दिल्ली दौरे ने बढ़ाया सियासी पारा

मुख्यमंत्री सुक्खू सोमवार को खराब मौसम के चलते हेलिकॉप्टर उड़ान न भर पाने के बाद सड़क मार्ग से दिल्ली रवाना हुए। खास बात यह रही कि उनके साथ कुल्लू विधायक सुंदर सिंह ठाकुर भी दिल्ली गए। आज मंगलवार को मुख्यमंत्री कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने वाले हैं। ऐसे में सुंदर सिंह ठाकुर की मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली मौजूदगी को कैबिनेट विस्तार की चल रही चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यही वजह है कि दिल्ली दौरे के बाद कांग्रेस के भीतर संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

 

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एक पद, कई दावेदार और बदलते समीकरण

हिमाचल सरकार में लंबे समय से खाली कैबिनेट पद को भरने की चर्चा चल रही है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली दौरों के दौरान कैबिनेट विस्तार और संभावित विभागीय फेरबदल को लेकर कांग्रेस हाईकमान के साथ बातचीत की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर की शुरुआत में भी सुंदर सिंह ठाकुर को संभावित दावेदार के तौर पर बताया गया था, जबकि पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल का नाम भी इस दौड़ में सामने आया।

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अब मुख्यमंत्री का सुंदर सिंह ठाकुर के साथ दिल्ली जाना राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी के भीतर मंत्री पद को लेकर अलग-अलग दावेदारियों की चर्चा है। ऐसे में सवाल सिर्फ एक विधायक को मंत्री बनाने का नहीं, बल्कि कैबिनेट के सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का भी बन गया है।

सुंदर ठाकुर के पक्ष में सुक्खू की पैरवी?

सुंदर सिंह ठाकुर को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू की पैरवी की चर्चा पहले से होती रही है। सितंबर में आई रिपोर्टों में भी उनके नाम को खाली मंत्री पद के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से बताया गया था। अब मुख्यमंत्री के साथ उनका दिल्ली जाना इस चर्चा को नया राजनीतिक संदर्भ दे रहा है। कांग्रेस हाईकमान के साथ मुख्यमंत्री की बैठकों में यदि कैबिनेट विस्तार का मुद्दा प्रमुखता से उठता है, तो सुंदर सिंह ठाकुर के नाम पर भी चर्चा होना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।

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आशीष बुटेल के नाम ने बढ़ाई खींचतान

दूसरी ओर पालमपुर विधायक आशीष बुटेल का नाम भी कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं में लगातार बना हुआ है। कांग्रेस के भीतर एक वर्ग सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से बुटेल को मंत्रिमंडल में जगह देने की पैरवी करता बताया जा रहा है। यही वह बिंदु है जहां कैबिनेट विस्तार महज एक मंत्री की नियुक्ति से आगे बढ़कर राजनीतिक संतुलन का सवाल बन जाता है। एक तरफ कुल्लू और व्यापक रूप से मध्य-पहाड़ी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व की चर्चा है, तो दूसरी तरफ कांगड़ा क्षेत्र को मंत्रिमंडल में पर्याप्त राजनीतिक वजन देने की मांग की बात सामने आती रही है।

सामाजिक समीकरण भी बने बड़ा फैक्टर

मंत्रिमंडल विस्तार की राह में केवल क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। हाल की रिपोर्टों में कैबिनेट में राजपूत चेहरों की संख्या और नए मंत्री के चयन को लेकर सामाजिक समीकरणों की चर्चा सामने आई है।

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यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व के सामने एक साथ कई राजनीतिक समीकरणों को साधने की चुनौती है। यदि सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाया जाता है तो क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब भी पार्टी को तलाशना होगा। वहीं आशीष बुटेल के नाम पर विचार होता है तो कांगड़ा क्षेत्र की राजनीतिक हिस्सेदारी का संदेश जाएगा।

क्या एक मंत्री की होगी विदाई?

कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावनाएं भी चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर ऐसी अटकलें हैं कि नए चेहरों को जगह देने के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा सकता है। पहले भी रिपोर्टों में दो नए चेहरों को शामिल करने और मौजूदा मंत्रियों में बदलाव की संभावना बताई गई थी। ऐसे में आने वाला फैसला केवल खाली पद भरने तक सीमित रहता है या व्यापक फेरबदल का रूप लेता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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दिल्ली में होगी सियासी तस्वीर साफ?

मुख्यमंत्री सुक्खू का दिल्ली दौरा कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बैठक में चुनावी रणनीति, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी ऐसे समय में है, जब हिमाचल कांग्रेस में संगठन और सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा चल रही है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी दिल्ली में हैं और कांग्रेस नेतृत्व से उनकी मुलाकात की बात सामने आई है। ऐसे में दिल्ली में एक ही समय पर मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने हिमाचल कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को और चर्चा में ला दिया है।

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अब निगाहें हाईकमान के फैसले पर

फिलहाल हिमाचल कांग्रेस की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाली मंत्री पद पर किस नाम की मुहर लगती है और क्या इसके साथ कैबिनेट में व्यापक बदलाव भी किया जाता है। सुंदर सिंह ठाकुर के साथ मुख्यमंत्री का दिल्ली पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम में नया राजनीतिक संकेत जरूर दे रहा है, लेकिन अंतिम फैसला सामने आने तक इसे किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।

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