#राजनीति
March 22, 2025
हिमाचल: धवाला की ज्वाला से BJP सहमी, चंडीगढ़ में जुटे 15 पूर्व विधायक-चुनौती देने की तैयारी
धवाला ने चंडीगढ़ में की बड़ी बैठक, 2027 चुनाव की तैयारी शुरू
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रमेश धवाला ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। देहरा से शुरू हुई उनकी नाराजगी अब पूरे प्रदेश में फैलती दिख रही है। BJP में खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे नेता अब पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। ये नेता आगामी पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल और 2027 के विधानसभा चुनाव को फाइनल मानकर रणनीति बना रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से नाराज 15 पूर्व विधायकों और दो अन्य बड़े नेताओं ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक BJP नेता के आवास पर बैठक की। इस बैठक में आने वाले समय में BJP के समानांतर संगठन खड़ा करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई।
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बैठक में तय किया गया कि BJP का नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उसके समक्ष अपनी मांगें रखी जाएंगी। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बड़े स्तर पर मोर्चा खोलेंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर देंगे।
BJP नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता रमेश धवाला का निर्वाचन क्षेत्र बदलकर देहरा कर दिया, जिससे वे बेहद नाराज थे। देहरा मंडल के चुनाव से असहमति जताते हुए उन्होंने समानांतर संगठन खड़ा कर दिया, जिसे उन्होंने 'असली भाजपा' नाम दिया। धवाला का कहना है कि पार्टी में उनकी लगातार अनदेखी हो रही है और वे इस मुद्दे को पूरे प्रदेश में उठाने की योजना बना रहे हैं।
इस बैठक में कांगड़ा के पूर्व विधायक संजय चौधरी और बैजनाथ के पूर्व विधायक दूलो राम सहित कई अन्य भाजपा नेता भी शामिल हुए। बैठक में चर्चा हुई कि यदि भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे।
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धवाला ने कहा कि BJP अब पहले जैसी पार्टी नहीं रही। बाहरी नेताओं ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है और पुराने व समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने करोड़ों रुपये के ऑफर को ठुकराकर भाजपा का दामन थामा था और उनकी बदौलत भाजपा सत्ता में आई थी।
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इस बैठक को भाजपा के खिलाफ एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रदेश में भाजपा के समानांतर संगठन खड़ा करने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। अगर पार्टी ने इन नाराज नेताओं की मांगें नहीं मानीं तो आने वाले चुनावों में भाजपा को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।