#राजनीति
March 22, 2025
हिमाचल: चुनाव हारे, तो सरकारी कार्यक्रमों से भी बाहर होंगे नेता! कैबिनेट में जाएगा मामला
समिति बनाएगी सरकार- विधानसभा अध्यक्ष ने लिया संज्ञान
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में चुनाव हार चुके नेताओं के सरकारी समारोहों और मेलों के उद्घाटन को लेकर विवाद के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा में सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही एक समिति गठित करेगी, जो यह तय करेगी कि सरकारी आयोजनों में मुख्य अतिथि कौन हो सकता है। समिति की सिफारिशों को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा ताकि भविष्य में इस मुद्दे पर कोई विवाद न हो।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि किसी भी विवाद से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह मामला विधानसभा की प्रोटोकॉल समिति के समक्ष रखा जाएगा और इससे जुड़ी गाइडलाइंस तय की जाएंगी। इससे सुनिश्चित होगा कि भविष्य में कोई अनावश्यक विवाद न खड़ा हो।
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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने विधायक राकेश जम्वाल के इस मुद्दे को जायज बताते हुए कहा कि कई विधानसभा क्षेत्रों में यह देखा गया है कि हारे हुए नेता जिला स्तरीय कार्यक्रमों में भी मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते रहे हैं। ऐसे में स्पष्ट निर्देशों की जरूरत है ताकि केवल संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति ही ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हों।
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विधानसभा में शून्यकाल के दौरान विधायक राकेश जम्वाल ने यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद चुनाव हारे हुए उम्मीदवारों को महत्वपूर्ण सरकारी समारोहों में मुख्य अतिथि बनाया जा रहा है। उन्होंने सुंदरनगर के राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले का उदाहरण दिया, जहां एक पराजित नेता को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि मंडी जिले में दो घटनाएं सामने आई हैं – द्रंग विधानसभा क्षेत्र और सुंदरनगर, जहां चुनाव में हारे हुए लोगों के नाम उद्घाटन पट्टिकाओं में दर्ज किए गए। जम्वाल ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश में किसी भी सरकारी आयोजन में संवैधानिक पद पर न बैठा व्यक्ति उद्घाटन नहीं करेगा, लेकिन इसके बावजूद इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा।
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इस विवाद को देखते हुए प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक करेगी, जिसमें विपक्ष के सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, भाषा एवं संस्कृति विभाग भी इस संबंध में अपने दिशा-निर्देश जारी करेगा ताकि भविष्य में कोई अनिश्चितता या विवाद न रहे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार द्वारा गठित समिति क्या सिफारिशें करती है और क्या इस फैसले से सरकारी आयोजनों में राजनीतिक विवादों पर अंकुश लग पाएगा।