#राजनीति
January 1, 2026
हिमाचल कांग्रेस में सियासी हलचल: सात दिन में हाईकमान संगठन को लेकर लेगा निर्णायक फैसला
एक सप्ताह में हिमाचल कांग्रेस को मिलेंगे नए जिला अध्यक्ष
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शिमला। नया साल शुरू होने के साथ ही अब हिमाचल कांग्रेस की सियासत में लंबे समय से पसरा संगठनात्मक सन्नाटा भी टूटने की कगार पर है। कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार प्रदेश संगठन को दोबारा खड़ा करने का बिगुल फूंक दिया है। महीनों की खामोशी और अंदरूनी बेचैनी के बाद पार्टी अब एक्शन मोड में नजर आ रही है और संकेत साफ हैं कि हिमाचल कांग्रेस को जल्द ही नई टीम मिलने वाली है।
शिमला से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से खाली पड़े संगठनात्मक ढांचे को भरने की दिशा में हाईकमान ने निर्णायक कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश को अगले कुछ दिनों में नए जिलाध्यक्ष मिलने जा रहे हैं, जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होना तय माना जा रहा है।
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बताया जा रहा है कि संगठनात्मक नियुक्तियों से जुड़ी पूरी कवायद अब अपने अंतिम चरण में है। राष्ट्रीय नेतृत्व के स्तर पर मंथन पूरा हो चुका है और जिलाध्यक्षों के नामों की सूची शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसारए अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है, जो कभी भी सामने आ सकती है।
इस बार जिलाध्यक्षों के चयन में पार्टी ने पारंपरिक तरीके से हटकर जमीन से जुड़े फीडबैक को तरजीह दी है। संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी ने अलग.अलग जिलों में पर्यवेक्षक भेजे थेए जिन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं से संवाद कर रिपोर्ट तैयार की। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर चेहरों का चयन किया गया है, ताकि संगठन को नीचे से ऊपर तक मजबूती दी जा सके।
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कांग्रेस के रणनीतिकार मानते हैं कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति महज एक शुरुआत है। इसके बाद संगठन में बदलाव की पूरी श्रृंखला देखने को मिलेगी। नए जिलाध्यक्षों के सामने ब्लॉक स्तर पर संगठन खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के पुनर्गठन और फ्रंटल संगठनों में भी फेरबदल की तैयारी चल रही है।
गौरतलब है कि नवंबर 2024 में पार्टी हाईकमान ने प्रदेश से लेकर ब्लॉक स्तर तक की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था। तब से संगठन लगभग निष्क्रिय अवस्था में था। केवल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति होने के बाद भी बाकी ढांचा खाली रहने से पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर उभरने लगे थे। कई वरिष्ठ नेताओं ने खुले तौर पर संगठन को सक्रिय करने की मांग उठाई थी।
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वहीं दूसरी तरफ खाली पड़े अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के पदों पर भी ताजपोशी होने वाली है। जिसके चलते कुर्सी के चाहवान सीएम के आवास ओक ओवर और सचिवालय के चक्कर लगाने लगे हैं। हालांकि लोग नव वर्ष की बधाई देने जा रहे हैं, लेकिन मौके का फायदा उठाते हुए निगमए बोर्ड और परिषदों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बनने के लिए अपनी पैरवी भी कर रहे हैं। बता दें कि प्रदेश में निगम बोर्ड और परिषद के अभी भी 18 के करीब पद रिक्त पड़े हैं, जिनमें जल्द ही नियुक्तियां होनी हैं। ऐसे में कुर्सी के चाहवानों में हलचल बढ़ गई है।