#राजनीति
November 17, 2025
सीएम सुक्खू ने अमित शाह से मांगे हिमाचल के हक, वन भूमि और PM घोषित 1500 करोड़ भी मांगे
सीएम सुक्खू ने अमित शाह के समक्ष उठाई हिमाचल के अधिकारों की सशक्त आवाज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज सोमवार को फरीदाबाद में आयोजित नॉर्दर्न जोनल काउंसिल की बैठक में अमित शाह से हिमाचल के अधिकारों को लेकर चर्चा की। सीएम सुक्खू ने इस दौरान राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को बड़े स्पष्ट और दमदार तरीके से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखा। बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उप.राज्यपालों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही, लेकिन हिमाचल के मुख्यमंत्री ने अपनी प्रस्तुति के दौरान राज्य के अधिकारों और लंबित मामलों को विशेष रूप से केंद्र के समक्ष उठाया।
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सीएम सुक्खू ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के आधार पर चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल के 7.19 प्रतिशत वैध हिस्से की मांग को विशेष महत्व दिया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को अवगत करवाया कि सुप्रीम कोर्ट के 2011 के आदेश में भी स्पष्ट कहा गया है कि जनसंख्या अनुपात के आधार पर हिमाचल इस हिस्सेदारी का हकदार है। सीएम ने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी मामला नहीं बल्कि हिमाचल का कानूनी और संवैधानिक अधिकार हैए जिसे अब तक मिलना बाकी है।
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बैठक में सीएम सुक्खू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से हिमाचल के 4000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया एरियर का मसला भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिमाचल का यह हिस्सा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय द्वारा सुनिश्चित किया गया है और केंद्र को इसे तत्काल लागू कर भुगतान करवाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बीबीएमबी बोर्ड में हिमाचल से एक स्थायी सदस्य की नियुक्ति की भी मांग रखी।
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सीएम ने यह मुद्दा भी अमित शाह के सामने रखा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल को वर्तमान 12 फीसदी मुफ्त बिजली रॉयल्टी दी जाती है, जिसे उन परियोजनाओं में 50 फीसदी तक बढ़ाया जाए, जिनकी लागत पूरी तरह वसूल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के नाते हिमाचल प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराता है और इसलिए उसे उसका उचित आर्थिक हक मिलना चाहिए।
सीएम सुक्खू ने आग्रह किया कि प्रदेश में संचालित 40 वर्ष से अधिक पुरानी जलविद्युत परियोजनाओं को अब राज्य सरकार को हस्तांतरित किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने निर्माणाधीन किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं के विद्युत घटक के लिए पूर्ण केंद्रीय वित्त पोषण की भी मांग रखी और सुझाव दिया कि परियोजनाएं पूरी होने पर हिमाचल और उत्तराखंड को 50-50 प्रतिशत बिजली दी जाए।
सीएम सुक्खू ने हिमाचल और केंद्र शासित लद्दाख के बीच सरचू और शिंकुला क्षेत्रों में सीमा विवाद के समाधान की मांग रखी। उन्होंने शिमला में पर्यावरण एवं वन विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय को एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय बनाने और वन मामलों की शीघ्र स्वीकृति देने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही सीएम ने आपदा प्रभावित परिवारों को पुनर्वास के लिए वन भूमि पर एक बीघा तक आवास निर्माण की अनुमति देने की मांग भी गृह मंत्री के सामने रखी।
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सीएम ने गृह मंत्री अमित शाह को बताया कि हिमाचल ने अपनी क्षमता से अधिक राहत देते हुए आपदा पीड़ितों की मदद की है, लेकिन राज्य अभी भी 10 हजार करोड़ रुपये के "पोस्ट डिजास्टर नीड असैसमेंट" पैकेज तथा प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का इंतजार कर रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि दोनों पैकेजों की राशि शीघ्र जारी की जाए।
सीएम ने हिमाचल में तेजी से बढ़ती पर्यटन संभावनाओं का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में हवाई संपर्क का विस्तार बेहद आवश्यक है। उन्होंने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण एवं परियोजना लागत का संपूर्ण वहन केंद्र द्वारा करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने छोटे एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट के लिए अलग मास्टर प्लान तैयार करने का सुझाव भी गृह मंत्री के समक्ष रखा।