#राजनीति
February 21, 2026
हिमाचल के 50 हजार करोड़ दांव पर: जंतर-मंतर में धरना देगी कांग्रेस, संसद घेराव की भी तैयारी
RDG और FTA को लेकर हाईकमान से लंबी बैठक
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शिमला। हिमाचल इन दिनों आर्थिक दबाव और नीतिगत फैसलों के असर से जूझ रहा है। एक तरफ रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता बढ़ी है, तो दूसरी तरफ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के कारण सेब उद्योग पर संकट की आशंका गहरा रही है। इन्हीं मुद्दों को लेकर शुक्रवार को दिल्ली में प्रदेश नेतृत्व ने कांग्रेस हाईकमान के साथ अहम बैठक की, जिसमें राज्य के भविष्य से जुड़े कई सवालों पर विस्तार से चर्चा हुई।
नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में CM सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने की।
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बैठक का मुख्य फोकस RDG की बहाली और FTA के कारण सेब कारोबार पर पड़ने वाले असर पर रहा। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि RDG बंद होने से हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले पांच वर्षों में राज्य को 40 से 50 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। राज्य के कुल बजट में RDG की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत बताई जा रही है। ऐसे में इसके रुकने को बड़ा झटका माना जा रहा है।
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बैठक के बाद जानकारी दी गई कि कांग्रेस हाईकमान इन दोनों मुद्दों को संसद में उठाएगा। राज्य सरकार भी अपने स्तर पर प्रधानमंत्री से RDG बहाल करने की मांग करेगी। यह भी कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 275 में इस प्रकार की सहायता का प्रावधान है, इसलिए कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
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डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि RDG हिमाचल का अधिकार है और इसे बिना पूर्व सूचना के रोकना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो संसद का घेराव और जंतर-मंतर पर धरना भी दिया जाएगा। उनका कहना था कि हर साल करीब दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान राज्य को उठाना पड़ सकता है।
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हाईकमान के साथ चर्चा के दौरान यह भी तय हुआ कि हिमाचल में जल्द एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी। इसमें RDG, FTA और मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जानकारी दी जाएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि इस रैली में राष्ट्रीय नेतृत्व भी शामिल होगा।
FTA को लेकर बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। प्रदेश नेतृत्व ने बताया कि हिमाचल का लगभग 5500 करोड़ रुपये का सेब उद्योग विदेशी आयात से प्रभावित हो सकता है। अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से बड़े पैमाने पर सेब आयात की संभावना जताई गई है। आयात शुल्क में कमी से देशी उत्पादकों को उचित दाम मिलने में दिक्कत आ सकती है।
राज्य सरकार का मानना है कि यदि आयात बढ़ा तो पहाड़ी किसानों की आजीविका पर असर पड़ेगा। सेब उत्पादन हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, ऐसे में इस पर किसी भी तरह का दबाव प्रदेश के लिए चिंता का विषय है।
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बैठक में मनरेगा को लेकर भी विचार हुआ। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिया कि यदि इस योजना को कमजोर किया गया तो प्रदेश में आंदोलन तेज किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का यह बड़ा साधन है, इसलिए इसे लेकर संवेदनशीलता दिखाई गई।
बैठक के दौरान राज्यसभा चुनाव को लेकर औपचारिक निर्णय नहीं हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री ने संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ इस विषय पर चर्चा की। अंतिम फैसला हाईकमान को लेना है। प्रदेश के कई नेता चाहते हैं कि इस बार हिमाचल से ही किसी नेता को राज्यसभा भेजा जाए। पिछली बार बाहरी चेहरे को उम्मीदवार बनाने के फैसले के बाद राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था, इसलिए इस बार सतर्कता बरती जा रही है।
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के अनुसार जल्द ही नई PCC, जिला और ब्लॉक स्तर की समितियों का गठन किया जाएगा, ताकि संगठन को मजबूत किया जा सके।
करीब एक घंटे चली इस बैठक में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह स्पष्ट है कि हिमाचल से जुड़े आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर अब राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति बनाई जा रही है। आने वाले दिनों में RDG, FTA और राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति और भी तेज हो सकती है।