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January 17, 2026

राज्यसभा चुनाव से पहले बिखरी कांग्रेस, क्या सुक्खू सरकार को महंगा पड़ेगा विक्रमादित्य विवाद...

कहीं राज्यसभा चुनाव में विक्रमादित्य सिंह ना बन जाएं कांग्रेस की हार कारण

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vikramaditya singh

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य के बयान के बाद बिखरती हुई नजर हा रही है। कांग्रेस सरकार आज एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां से फरवरी 2024 में कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में करारी चोट लगी थी। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस  सरकार में उभरता असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार भीतर से दो धड़ों में बंटी दिखाई दे रही है। ऐसे में यह सवाल फिर से उठने लगा है कि कुछ ही समय बाद होने वाले राज्यसभा सीट के चुनाव में क्या कांग्रेस एक फिर इतिहास दोहराएगी। 

सांसद इंदू गोस्वामी का खत्म हो रहा कार्यकाल

बता दें कि हिमाचल कांग्रेस में यह सियासी उथल.पुथल ऐसे समय पर सामने आई है, जब राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का कार्यकाल 10 अप्रैल को समाप्त होने वाला है और उससे पहले चुनाव प्रस्तावित है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर जिस तरह की गुटबाजी उभर रही है, वह फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव की याद दिला रही है, जब बहुमत में होने के बावजूद कांग्रेस सीट हार गई थी।

 

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क्या इतिहास दोहराएगी कांग्रेस

बता दें कि फरवरी 2024 में भी हिमाचल की एक राज्यसभा सीट पर चुनाव हुए थे। जिसमें कांग्रेस के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी भाजपा के उम्मीदवार हर्ष महाजन से चुनाव हार गए थे। फरवरी 2024 का राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ था। उस समय भी पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर था। विक्रमादित्य सिंह ने अपने पिता और छह बार के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह की प्रतिमा न लगने को लेकर नाराजगी जताई थी और मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया था।

 

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उस चुनाव में कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जबकि सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाला। नतीजा यह हुआ कि बहुमत के बावजूद कांग्रेस राज्यसभा सीट हार गई। अब एक बार फिर वही संकेत मिल रहे हैं कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है।

क्या इस बार भी हार की वजह बनेंगे विक्रमादित्य

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या इस बार भी कांग्रेस की संभावित हार की वजह विक्रमादित्य सिंह से जुड़ा असंतोष बनेगा। जिस तरह पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री गुट के साथ उनका टकराव बढ़ रहा है, उससे भाजपा को रणनीतिक बढ़त मिलती दिख रही है। भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर करीबी नजर बनाए हुए है और राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। 

 

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कांग्रेस की गुटबाजी का भाजपा उठाएगी फायदा

कांग्रेस में मचे सियासी घमासान पर हिमाचल भाजपा नजर बनाए हुए है। हिमाचल भाजपा एक बार फिर कांग्रेस की इस गुटबाजी का भरपूर फायदा उठाने की फिराक में है। भाजपा कांग्रेस की इसी गुटबाजी से दोबार राज्यसभा सीट जीतने की तैयारी शुरू कर चुकी है। 

अनुराग ठाकुर के बयान ने ऑपरेशन लोटस की बढ़ाई चर्चा

इस सब के बीच अब हिमाचल भाजपा के सांसद अनुराग ठाकुर के एक बयान ने सियासी उबाल को और बढ़ा दिया है। अनुराग ठाकुर के बयान के बाद अब एक बार फिर ऑपरेशन लोटस 2 की चर्चाओं तेज हो गई हैं। आज ऊना पहुंचे अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस के अंदर चल रही बयानबाजी पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस तरह कांग्रेस के मंत्री सार्वजनिक रूप से एकण्दूसरे पर हमले कर रहे हैं, वह किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस का कुनबा पहले कभी इस तरह खुलकर नहीं बिखरा और मौजूदा हालात यह बता रहे हैं कि सत्ता के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में ऑपरेशन लोटस.2 को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

विक्रमादित्य के बयान पर दो फाड़ हुई कांग्रेस

विवाद की शुरुआत मंत्री विक्रमादित्य सिंह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था और बाहरी राज्यों से आए अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाए। इस टिप्पणी को कांग्रेस के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने सीधे तौर पर चुनौती दी। राजस्व मंत्री जगत नेगीए पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विक्रमादित्य के कामकाज और बयानबाजी पर तीखे पलटवार किए।

 

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अनिरुद्ध सिंह की टिप्पणी कि काम कराना आना चाहिए, ने विवाद को और हवा दे दी। इसके जवाब में विक्रमादित्य सिंह ने भी एनएचएआईअधिकारियों से जुड़ी मारपीट की पुरानी घटना का जिक्र कर अनिरुद्ध सिंह को कटघरे में खड़ा कर दिया। इस आपसी टकराव ने साफ कर दिया कि कांग्रेस सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

 

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डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस संगठन डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुट गया है। प्रदेश अध्यक्ष ने संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री से बातचीत कर मंत्रियों और विधायकों को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने के निर्देश दिए जाएंगे। पार्टी आधिकारिक तौर पर एकजुटता का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

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