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January 17, 2026

कांग्रेस की कलह पर अनुराग ठाकुर ने दिए राजनीतिक उलटफेर के संकेत, "ऑपरेशन लोटस" की चर्चा तेज

राज्यसभा चुनाव से पहले एक बार फिर संकट में कांग्रेस, मौके की तलाश में भाजपा

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Anurag singh thakur comment congress

ऊना। हिमाचल प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी खींचतान के दौर से गुजर रही है। विक्रमादित्य के बयान के बाद हिमाचल कांग्रेस की पूरी कैबिनेट ही दो फाड़ हो गई है। कांग्रेस में यह सियासी घमासान उस समय उठा है, जब कुछ ही माह में राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में एक बार फिर ऑपरेशन लोटस की चर्चाओं ने सियासी तापमान को बढ़ा दिया है। इस तापमान को हिमाचल के भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के बयान ने और ज्यादा हवा दे दी है। 


बता दें कि इससे पहले फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी विक्रमादित्य के बयान से घमासान मचा था और कांग्रेस को बहुमत होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव सीट गंवानी पड़ी थी। उस दौरान कांग्रेस की सरकार गिरते गिरते बची थी और ऑपरेशन लोट्स की प्रवल संभावना बनी हुई थी। अब अनुराग ठाकुर के बयान ने एक बार फिर ऑपरेशन लोटस 2 की चर्चाओं को हवा दे दी है।

 

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दो फाड़ हो रही कांग्रेस सरकार

दरअसल विक्रमादित्य के बयान के बाद कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है। राज्यसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर उभरा असंतोष अब खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के एक बयान ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा किया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कैबिनेट में दरारें साफ नजर आने लगी हैं। इसी बीच भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के बयान ने कांग्रेस के इस आंतरिक घमासान को ऑपरेशन लोटस की चर्चाओं से जोड़कर सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।

 

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अनुराग ठाकुर का तंज

दिशा कमेटी की बैठक के लिए ऊना पहुंचे भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस के अंदर चल रही बयानबाजी पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस तरह कांग्रेस के मंत्री सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं, वह किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस का कुनबा पहले कभी इस तरह खुलकर नहीं बिखरा और मौजूदा हालात यह बता रहे हैं कि सत्ता के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में "ऑपरेशन लोटस-2" को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विक्रमादित्य के बयान से शुरू हुआ सियासी संग्राम

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रशासन में बाहरी अफसरों की भूमिका को लेकर टिप्पणी की। इस बयान को कांग्रेस के ही कई मंत्रियों ने असहजता के साथ लिया और एक के बाद एक पलटवार शुरू हो गया। राजस्व मंत्री जगत नेगी, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विक्रमादित्य सिंह पर कामकाज और बयानबाजी को लेकर सवाल उठाए। जवाब में विक्रमादित्य सिंह ने भी अनिरुद्ध सिंह से जुड़े पुराने विवादों को याद दिलाकर मोर्चा संभाल लिया।

 

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इस जुबानी जंग ने पार्टी के भीतर गुटबाजी को और उजागर कर दिया। सोशल मीडिया पर यह लड़ाई साफ तौर पर होली लॉज बनाम ओक ओवर की शक्ल ले चुकी है। मुख्यमंत्री के करीबी नेता एक तरफ नजर आ रहे हैं, जबकि वीरभद्र सिंह परिवार से जुड़े समर्थक दूसरी ओर खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

बहुमत के बावजूद हारी थी कांग्रेस

यह पूरा घटनाक्रम ठीक उस समय शुरू हुआ है, जब हिमाचल की एक राज्यसभा सीट पर कुछ ही माह बाद चुनाव होने हैं। मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और उससे पहले चुनाव होना है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के भीतर जिस तरह असंतोष सामने आया था, उसकी यादें अभी ताजा हैं। उस वक्त भी विक्रमादित्य सिंह की नाराजगी खुलकर सामने आई थी और पार्टी को बहुमत के बावजूद हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर कांग्रेस के अंदर उभरती गुटबाजी ने भाजपा को अवसर की तलाश में लगा दिया है। अनुराग ठाकुर के बयान को इसी रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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बीजेपी की रणनीति और ऑपरेशन लोटस की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर लगातार नजर बनाए हुए है। पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने और राजनीतिक समीकरण साधने को लेकर उच्च स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। "ऑपरेशन लोटस" शब्द एक बार फिर सियासी गलियारों में गूंजने लगा है। विधानसभा के संख्याबल पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास अभी स्पष्ट बहुमत है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए भाजपा को भरोसा है कि कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है।

 

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