#उपलब्धि
January 18, 2026
हिमाचल : बड़े बैंक में अफसर बना गांव का बेटा, बिना किसी कोचिंग के हासिल की सफलता
सूर्यांश की उपलब्धि के बाद पूरे इलाके में खुशी का माहौल है
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सिरमौर। कहते हैं कि हौसलों की उड़ान ऊंची हो अगर, तो मंजिलें खुद चलकर पास आती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिया है सिरमौर जिले के एक गांव के बेटे ने- जो कि बिना किसी कोचिंग में बड़े बैंक में अफसर बन गया है।
ददाहू क्षेत्र के होनहार बेटे सूर्यांश शर्मा ने इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (IBPS) द्वारा आयोजित बैंक प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
महज 24 वर्ष की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर सूर्यांश ने यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन, अनुशासन और आत्मविश्वास के सामने कोई भी परीक्षा कठिन नहीं होती। इस
IBPS द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित परीक्षा में देशभर से करीब 12 लाख अभ्यर्थियों ने प्रोबेशनरी ऑफिसर और स्पेशल ऑफिसर पदों के लिए भाग लिया था। इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच केवल 5208 उम्मीदवारों का चयन PO पद के लिए किया गया।
इस चयन सूची में सूर्यांश शर्मा का नाम शामिल होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्हें इंडियन बैंक आवंटित किया गया है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत शुरुआत मानी जा रही है।
सूर्यांश शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा DAVN स्कूल ददाहू से हुई। इसके बाद उन्होंने दसवीं की परीक्षा अकाल अकादमी बडू साहिब से उत्तीर्ण की। बारहवीं की पढ़ाई उन्होंने नाहन से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए सूर्यांश ने DAV कॉलेज चंडीगढ़ का रुख किया, जहां से उन्होंने BSC की डिग्री हासिल की।
सूर्यांश के पिता रविंद्र शर्मा और माता रामेश्वरी शर्मा ने बताया कि उनके बेटे ने यह मुकाम पूरी तरह सेल्फ स्टडी के जरिए हासिल किया है। उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि नियमित अध्ययन, निरंतर अभ्यास और समय प्रबंधन को अपना हथियार बनाया।
परिवार के अनुसार सूर्यांश रोजाना तय समय पर पढ़ाई करता था और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देता था। यही अनुशासन उसकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बना।
अपनी सफलता पर सूर्यांश शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि अकेले उनकी नहीं है। उन्होंने इसका श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया, जिनके मार्गदर्शन, सहयोग और आशीर्वाद से वह इस मुकाम तक पहुंच सके। सूर्यांश का कहना है कि सकारात्मक सोच और धैर्य बनाए रखना किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में बेहद जरूरी है।
सूर्यांश की इस सफलता से ददाहू, रेणुका और आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और युवाओं ने उनकी उपलब्धि पर गर्व जताया है। खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए सूर्यांश एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं, जो यह संदेश दे रहे हैं कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की कमी असली बाधा होती है।